Saturday, April 6, 2013

लोकप्रिय समाजसेवी मीठालाल बोराणा का निधन

लोकप्रिय समाजसेवी मीठालाल बोराणा का निधन

पाली-मारवाड़,६ अप्रेल । व्यापार व्यवसाय से निवृति लेकर पिछले दो दशक से भी अधिक समय से निरंतर समाजसेवा में लीन मारवाड़ के लोकप्रिय समाजसेवी श्री मीठालाल बोराणा का ७८ वर्ष की उम्र में अपनी जन्म भूमि बागोल में आज अचानक दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया । श्री बोराणा पिछले कई सालो से जैनियों के पवित्र स्थल पालिताना, मारवाड़ के सोमेसर और मुंबई की मुलुंड सहित कई सामाजिक, शैक्षणिक और धार्मिक संस्थाओ से जुड़े रहते हुए पुरे समाज को सेवा दे रहे थे। अपनी जन्मभूमि के प्रति अपने प्रेम और लगाव के रहते मारवाड़ और उसके विकाश के लिए हमेशा तत्पर रहते थे | अंतिम पांच दिनों से बागोल में आयोजित सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रम में ही भाग लेकर मुंबई लौटने ही वाले थे की शनिवार की दोपहर अचानक दिल का दौरा पड़ा और अपने प्राण त्याग दिए।

श्री मीठालाल बोराणा राजस्थान जैन संघ मुलुंड मुंबई, पालिताना जैन तीर्थ एवं बागोल जैन संघ सहित मारवाड़ की कई संस्थाओ के प्रमुख पदों पर रहते हुए अपनी सेवा दे रहे थे उनके निधन से सिर्फ उनके परिवार को ही  नहीं बल्कि पुरे समाज को बहुत बड़ी हानि हुई वे अपने पीछे पुत्र पौत्र सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गए । उन्होंने अपने जीवन को समाज के लिए अपनी सेवा के लिए खुद को हमेशा समर्पित रखा।


Saturday, December 29, 2012

भारत की प्रमुख 500 कंपनियों की सूचि में राजस्थान के मारवाड़ से दो

हाल ही में प्रकाशित इकोनोमिक टाइम्स द्वारा जारी भारत की प्रमुख 500 कंपनियों की सूचि में राजस्थान के मारवाड़, मेवाड़, हाड़ोती और शेखावटी क्षेत्र से आये व्यापारी बन्धुओ की कुल कितनी कंपनिया हैं यह कहना आसान तो नहीं हैं लेकिन मारवाड़ से दो कंपनियों के नाम जरुर गिनाये जा सकते हैं जिनमे टेक्सटाइल से नाकोडा और स्टिल उद्योग से वरुण इंडस्ट्री का नाम प्रमुख हैं। पुरे भारत की 500 प्रमुख कंपनियों की सूचि में राजस्थान से करीब 50 कंपनिया होगी तो मारवाड़ से केवल दो नाम का होना शर्म की बात तो हैं पर ऐसा हैं तो क्यों ?
मारवाड़ के व्यापारी बन्धुओ का पब्लिक भागीदारी में विश्वास की कमी के कारण ही 500 की सूचि में सिर्फ दो नाम हैं लेकिन क्या आने वाली पीढ़िया इस बात के लिए हमें माफ़ कर पायेगी आज हम अपने बच्चो को ग्रेजुशन  पढाई लिखाई पूरी करवाकर नौकरी की प्रेरणा दे रहे हैं क्योंकि हमें मालूम हैं की यह पढ़े लिखे युवा पारंपरिक तरीके से तो व्यापर करेंगे नहीं और कोरपोरेट व्यापार के लिए इतनी पूंजी हैं नहीं। आज कोरपोरेट व्यापार के लिए कम से कम सौ करोड़ की पूंजी की आवश्यकता हैं और उतनी पूंजी हमारे मारवाड़ के लोग अपनी पूरी जिन्दगी में नहीं जुटा पाए इसलिए आज व्यापारी खानदान के बच्चो को नौकरी की प्रेरणा दे रहे हैं। अगर समय रहते हमारा विश्वास भागीदारी और इक्विटी पर मजबूत नहीं हुआ तो एक जनरेशन का नौकरी में चले जाने पर अगली तीन चार पीढ़िया भी वापस कभी उद्योग व्यापार में नहीं आ सकती हैं। इक्विटी इवेस्टमेंट में भरोसा ही आने वाली जनरेशन के लिए कोर्पोरेट जगत में स्थान बना सकता हैं । व्यापारी जब तक अपने आप को एक अच्छा इन्वेस्टर नहीं बना सकता हैं तब तक कॉर्पोरेट जगत में अपने आपको कभी भी स्थापित नहीं कर सकते हैं।

Monday, February 6, 2012

पाली जिले में रोहट के पास मांडावास में नए एयरपोर्ट के लिए प्रस्ताव

‘हवा’ में उड़ रहा है जोधपुर हवाई अड्डा !

जोधपुर, शहर में 46 किलोमीटर की परिधि से बाहर नए एयरपोर्ट के लिए वायुसेना एनओसी देने के लिए तैयार है, लेकिन यह मुद्दा फिलहाल तो प्रशासनिक स्तर पर ही सुलझता नहीं दिख रहा। तीन प्रमुख अफसर- संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर और जेडीए आयुक्त एयरपोर्ट की जगह को लेकर एकमत नहीं हैं, ऐसे में तीनों के बीच कोई तालमेल नजर नहीं आ रहा। राज्य सरकार को प्रस्ताव पर प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं। इन कारणों से सवाल खड़ा हो रहा है कि सूर्यनगरी में नए एयरपोर्ट के लिए गंभीर प्रयास हो भी रहे हैं या नहीं?

मांडावास के लिए भेजा है प्रस्ताव : "पाली जिले में रोहट के पास मांडावास में नए एयरपोर्ट के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। पाली रोड पर दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (डीएमआईसी) के तहत इंडस्ट्रियल रीजन प्रस्तावित है। इसलिए जोधपुर व पाली के बीच ही हवाई अड्डा स्थापित करना उचित रहेगा। राज्य सरकार ने भी रोहट के लिए प्रस्ताव भेजा है। इसके लिए डीएमआईसी फंड देने के लिए भी तैयार है। इसके अलावा अन्य प्रस्तावों पर भी विचार किया जा सकता है।" रमेश कुमार जैन, संभागीय आयुक्त

संभागीय आयुक्त का प्रस्ताव उचित नहीं : "संभागीय आयुक्त के प्रस्ताव को यदि माना जाता है तो नया एयरपोर्ट शहर से 70 किलोमीटर दूर स्थापित होगा, जहां पहुंचने में ही एक घंटा लगेगा। इतनी देर में तो दिल्ली पहुंचा जा सकता है। इससे लोगों को परेशानी होगी। पुराने एयरपोर्ट के विस्तार का प्रस्ताव एयरपोर्ट अथॉरिटी ने मान लिया है। इसके लिए नगर निगम से 265 बीघा जमीन मांगी गई है। वहीं नागौर रोड पर भी नया एयरपोर्ट स्थापित किया जा सकता है।" सिद्धार्थ महाजन, कलेक्टर

नागौर रोड ही उचित जगह : "नागौर रोड एजुकेशन हब के रूप में उभर रही है। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी व आयुर्वेद यूनिवर्सिटी के अलावा आईआईटी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (एनआईएफटी), फुटवियर डिजाइन एंड डवलपमेंट इंस्टीट्यूट (एफडीडीआई), साइंस पार्क आदि इस रोड पर ही स्थापित होंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए नागौर रोड पर भूमि तलाश रहे हैं। अन्य क्षेत्रों में 46 किलोमीटर का दायरा भी पूर्ण नहीं होगा।" रतन लाहोटी, जेडीए आयुक्त

Friday, February 3, 2012

जोधपुर एयरपोर्ट के लिए पाली मार्ग पर नई जगह तलास की मांग

जोधपुर एयरपोर्ट के लिए पाली मार्ग पर नई जगह तलास की मांग मारवाड़ जैन संघ मुंबई प्रमुख भरत सोलंकी ने केंद्र सरकार से की हैं| संघ का मानना हैं की पाली एक बहुत बड़ी औद्योगिक नगरी हैं एवं मुंबई से पाली कई व्यापारी बंधुओ का हवाई यात्रा द्वारा अकसर आना जाना रहता हैं और अगर जोधपुर एयरपोर्ट पाली मार्ग पर बनता हैं तो पाली और जोधपुर दोनों शहरों के व्यापारी बंधुओ के लिए यह सुविधाजनक होगा|
जोधपुर एयरफोर्स के नागौर रोड पर मेलावास गांगाणी में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए एनओसी नहीं देने पर अब जोधपुर विकास प्राधिकरण ने संभावित नई जगह की तलाश तेज कर दी है। जेडीए आयुक्त ने उपायुक्तों को 46 किलोमीटर के बाद की दूरी पर एयरपोर्ट के लिए सरकारी जमीन तलाशने की मुहिम में लगाया है। एयरपोर्ट के लिए शहर के चारों तरफ जमीन की तेजी से तलाश की जा रही है, ताकि नए सिरे से एयरफोर्स के समक्ष एनओसी के लिए आवेदन किया जा सके। हालांकि जोधपुर कलेक्टर का मानना है कि इतनी दूरी पर एयरपोर्ट बनाने के बजाय पुणो की तर्ज पर सिविल एयरपोर्ट के विस्तार पर विचार किया जा सकता है।

एयरफोर्स ने मुख्य सचिव को भेजे पत्र में बताया कि प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की कंट्रोल जोन की परिधि 46 किमी है, जो कि जोधपुर एयरफील्ड को कवर करती है। एयरफील्ड पर ऑपरेशनल गतिविधियों और लड़ाकू विमानों के संचालन की ट्रेंनिग की वजह से यह हवाई एरिया प्रतिबंधित है। प्रस्तावित एयरपोर्ट के नजदीक ही आर्मी का रन-वे भी है। इस वजह से वहां एनओसी नहीं दी जा सकती। मुख्य सचिव ने यह पत्र जेडीए आयुक्त को भेज अन्यत्र जमीन तलाश करने को कहा है।

एयरपोर्ट अथॉरिटी के निदेशक सुरेश बोरकर ने बताया कि शहर के बीच होने की वजह से सिविल एयरपोर्ट का विस्तार होना चाहिए, लेकिन अथॉरिटी को शहर से पचास किमी दूरी पर भी नया एयरपोर्ट बनाने पर कोई ऐतराज नहीं है। जल्द ही एक जमीन चिह्न्ति कर एयरपोर्ट अथॉरिटी टीम को बुलाकर दिखाई जाएगी। उसके बाद एयरफोर्स के समक्ष नए सिरे से एनओसी के लिए आवेदन किया जाएगा। यह भी तय नहीं है कि नई जगह के लिए एयरफोर्स एनओसी दे ही दे, इसलिए दूसरे विकल्प के बारे में विचार करने की जरूरत है। हालांकि कोई रास्ता निकालने के लिए एयरफोर्स, जेडीए, नगर निगम और एयरपोर्ट अथॉरिटी के अधिकारियों की जल्द बैठक की जाएगी।

सिद्धार्थ महाजन, कलेक्टर, जोधपुर के अनुसार नया एयरपोर्ट शहर से इतनी दूरी पर बनाया जाना आमजन व पर्यटकों के लिए काफी दुविधाजनक रहेगा। नागौर रोड पर प्रस्तावित एयरपोर्ट के लिए एनओसी नहीं मिली है, इसलिए वर्तमान सिविल एयरपोर्ट का विस्तार कर उसे इंटरनेशनल एयरपोर्ट में तब्दील करना चाहिए।

जोधपुर एयरपोर्ट अगर पाली मार्ग पर बनता हैं तो जालोर, फालना एवं रानी के साथ पाली के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं अतः इस विशेष विषय पर अधिक से अधिक लोगो को जोड़कर सरकार का ध्यान आकर्षित करे |

Tuesday, June 28, 2011

कुम्भलगढ़ का पानी खम्भात की खाड़ी में और मारवाड़ प्यासा


मारवाड़ की सादडी रेंज अधीनस्थ कुम्भलगढ़ वन्य जीव अभ्यारण्य की अरावली पर्वत श्रंखलाओं से निकलने वाली नदियों का पानी गुजरात की धरोई बांध से साबरमती का सफ़र करते हुए खम्भात की खाड़ी में मिल जाता हैं इधर मारवाड़ की तरफ बहने वाली नदियों का पिछले साठ सालो में राजा महाराजाओ की रियासतों के बाद नदी नालो के बीच मौजूदा प्राकृतिक झील-झरोखों की साफ सफाई करवाना उचित नहीं समजा गया जिसके कारण मारवाड़ इलाके की प्राकृतिक झीलों में मिटटी, रेती और पत्थर की भरती जमा हो गई और पानी का इस्तर सेकडो मिल नीचे चला गया जिसके चलते बारिश के दिनों में जो भी थोडा बहुत पानी मारवाड़ की तरफ उतरता हैं वो सीधा मैदानी इलाको में जाकर व्यर्थ बह जाता हैं और पूरा मारवाड़ प्यासा का प्यासा रह जाता हैं ।
गूगल मेप में किये गये एक सर्वेक्षण के आधार पर मिली जानकारी के अनुसार कुम्भलगढ़ के आस पास पर्वतीय शृंखलाओ में बारिश के दिनों में एकत्रित होने वाला पानी मेवाड के रास्ते सायरा गोगुन्दा होते हुए गुजरात के धरोई बांध को पानी की भरपूर आपूर्ति करता हैं और धरोई बांध से निकलने वाली नदी आगे चल कर साबरमती नदी बन जाती हैं और आखिर में यह पानी खम्भात की खाड़ी में होते हुए समुद्र में विलीन हो जाता हैं ।
मारवाड़ के सिरियारी, फुलाद, जोजावर, कोट, बागोल, सुमेर, देसुरी, घाणेराव, सादडी, लुनावा और पिण्डवाडा आदि गाँवो की तरफ आने वाली नदियों के मुख्य स्रोत के बीच इन प्राकृतिक झीलों के निशान गूगल मेप में स्पष्ट देखे जा सकते हैं जो समुद्र तल से करीब तीन हजार फीट ऊपर स्थित कुम्भलगढ़, दीवेर, राणकपुर, सायरा और गोगुन्दा की अरावली पर्वतीय श्रंखलाओ में आसानी से देखे जा सकते हैं ।
मारवाड़ में हायवे सड़क निर्माण का कार्य सरकार शरू कर चुकी हैं जिसमे लगने वाली वाली सामग्री में रेती, मिटटी और कोंक्रिट की आपूति के लिए पंचायतो की मदद से निजी ठेकेदारों को नियुक्त कर इन नदी नालो के ऊपर स्थित झीलों में से यह सामग्री उपलब्ध कराई जा सकती हैं जिससे अरावली में पानी की संग्रहण क्षमता बढ़ेगी । पानी का अपना खुद का स्वभाव ही ऐसा हैं की वह अपना स्तर कभी नहीं छोड़ता हैं वह धरती पर हर वक्त अपने लेवल पर हमेशा मौजूद रहता हैं बशर्ते उसके मार्ग में आने वाली रूकावटो को खोला जाए और पर्वतो में मौजूद इन प्राकृतिक झीलों को खुला कर देने का मतलब अरावली में हरियाली एवं मारवाड़ का विकास ।

Monday, November 22, 2010

Police gun down Coimbatore killer

Arrested for abduction and murder of 2 minors, the 23-yr-old was trying to flee



The van driver who was recently arrested for kidnapping, torture and murder of two school children in Coimbatore was shot dead in an alleged police encounter on Tuesday morning. Two policemen were also injured in the encounter.



Mohankrishnan had allegedly snatched a cop’s revolver and opened fire. The victims – Muskan and Hrithik – with their parents

The incident took place when a police team was taking the accused Mohanakrishnan, 23, and his accomplice Manoharan, 23, in two separate police vans to the crime scene – where they had allegedly tortured and killed siblings Muskan Jain, 11, and her brother Hrithik Jain, 8, on October 29 – some 35 km away at Ankalakurichi near Pollachi, police said.

On the way, Mohanakrishnan – the school van driver who was the main accused in the case – snatched the revolver of police sub-inspector Jyothi and opened fire, injuring Jyothi and his colleague Muthumlai. Police inspector Annadurai, who was also travelling in the police vehicle, and Muthumalai opened retaliatory fire that critically injured Mohanakrishnan, who later died at Coimbatore Medical College Hospital. The two injured policemen were also hospitalised, and were out of danger, police added.

“Near Podanur, Mohanakrishnan grabbed Jyothi's revolver and demanded the van to be taken towards Tamil Nadu-Kerala border. When the cops resisted, Mohan opened fire.

Interestingly, Mohan was not handcuffed at the time of the incident.

The twin murder of Muskan and her brother, children of textile merchant Ranjit Kumar Jain
origin from Deuri,Pali Marwad,Rajasthan , had rocked Tamil Nadu. Muskan and Hrithik were abducted on October 28 near their house at Town Hall area in Coimbatore. While the body of Muskan was fished out from Parambikulam Aliyar Project (PAP) canal near a dam site about 77 km away from Coimbatore, Hrithik’s remains were found the next day from a lake in Tirupur district.



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Friday, November 12, 2010

Dam Development Project & Multinational Companies

देश की प्रगति में पानी की महत्वपूर्ण भूमिका
पानी किसी भी प्रदेश, शहर अथवा गांव के विकास के लिए मुलभुत आवश्यकता हैं ! मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, बंगलूरु अथवा कोई भी शहर को पानी मिलना अगर बंद हो जाए तो शहर में रहने वाले लोगो का शहर में रहना मुश्किल हो जाता हैं, ठीक वैसे ही गाँवो के विकास और खेती के लिए आवश्यक पानी का होना जरुरी हैं! पानी कुदरत की ओर से तो शहरों और गाँवो को समान रूप से मिलता हैं, पर शहर के लोगो को पेयजल की आपूर्ति के लिए शहरों के नजदीक जल संग्रह करने हेतु झीलों का निर्माण किया जाता हैं! पानी किसी भी शहर की लाइफ लाइन हैं वैसे ही गाँवो में खेती का उत्पादन पुरे प्रदेश अथवा देश की भुखमरी को मिटाने का एक मात्र जरिया हैं! आज देश की हजारो नदियों का लाखो करोडो गेलन पानी, जिसका समुचित संग्रह वितरण व्यवस्था नहीं होने के कारण व्यर्थ में ही बरबाद हो जाता हैं! अगर इस पुरे पानी की समुचित संग्रह वितरण व्यवस्था की जाए तो भारत पूरी दुनिया को खाध्य आपूर्ति करने सक्षम साबित हो सकता हैं ! अब तक हम बांध झीलों एवं नहरों के निर्माण के लिए सरकार पर निर्भर रहे पर सरकार की भी अपनी सीमाए होने के कारण जितना निर्माण होना चाहिये था उतना नहीं हो पाया पर अब सिर्फ सरकार के भरोसे बैठ कर काम चलने वाला नहीं हैं और इस तरह तो और भी सेकडो साल निकल जायेंगे!
महाराष्ट्र देश में सहकारिता का उदाहरण हैं अगर सहकारिता के माध्यम से इस काम को पुरे देश में अंजाम दिया जाए तो अगले पांच साल में देश का पूरा नक्षा ही बदल सकता हैं| पूंजी निवेश के लिए मलटीनेशनल एवं निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ भागीदारी के माध्यम से देश भर में बांधो एवं झीलों का निर्माण और जल आपूर्ति की व्यवस्था की जाए तो वो दिन दूर नहीं जब भारत दुनिया की सबसे बड़ी ताकत के रूप में उभर कर सामने आये! सरकार को चाहिये की वह इस कार्य हेतु योजनाये बनाये और मलटीनेशनल एवं निजी क्षेत्र की देशी कंपनियों को बांध एवं झीलों के निर्माण कार्य के आमंत्रित करे!