The van driver who was recently arrested for kidnapping, torture and murder of two school children in Coimbatore was shot dead in an alleged police encounter on Tuesday morning. Two policemen were also injured in the encounter.
On the way, Mohanakrishnan – the school van driver who was the main accused in the case – snatched the revolver of police sub-inspector Jyothi and opened fire, injuring Jyothi and his colleague Muthumlai. Police inspector Annadurai, who was also travelling in the police vehicle, and Muthumalai opened retaliatory fire that critically injured Mohanakrishnan, who later died at Coimbatore Medical College Hospital. The two injured policemen were also hospitalised, and were out of danger, police added. “Near Podanur, Mohanakrishnan grabbed Jyothi's revolver and demanded the van to be taken towards Tamil Nadu-Kerala border. When the cops resisted, Mohan opened fire. Interestingly, Mohan was not handcuffed at the time of the incident. The twin murder of Muskan and her brother, children of textile merchant Ranjit Kumar Jain origin from Deuri,Pali Marwad,Rajasthan , had rocked Tamil Nadu. Muskan and Hrithik were abducted on October 28 near their house at Town Hall area in Coimbatore. While the body of Muskan was fished out from Parambikulam Aliyar Project (PAP) canal near a dam site about 77 km away from Coimbatore, Hrithik’s remains were found the next day from a lake in Tirupur district. |
Sunday, October 20, 2013
Fake currency note from Bank
बैंक से भी मिलने लगे नकली नोट
मुंबई । बैंक से भुगतान लेते समय विशेष सावधानी बरतें, क्योकि कुछ नोट जाली भी हो सकते हैं। ऐसी शिकायतें आए दिन आ रही हैं कि बैंक से नकली नोट मिले। यहां तक कि एटीएम से निकाले जाने वाले नोटों में भी जाली नोट निकल ही आता है।
बैंकों से भुगतान के बाद अगर उन्हीं नोटों को दूसरी बैंक में जमा करने या मार्केट में चलाने जाएं तो उसमें से कोई न कोई जाली नोट पकड़ में आ जाता है।सबसे ज्यादा शिकायतें पांच सौ और हजार के नोट की आती हैं। बैकों से जानकारी करने पर पता चला कि शहर में स्थित कुछ बैंकों में अल्ट्रावायलेट मशीनें हैं, शेष में नहीं। लेजर विकरण की सहायता से मशीन जाली नोट पहचान कर उसे नोटों की गड्डी से अलग कर देती है।
चेम्बूर निवासी अम्बरीशकुमार सिंह का कहना है कि वे कारपोरेशन बैंक की पीएम रोड फोर्ट शाखा से पैतीस हजार रुपये निकालकर लाए थे और उसी रकम में से बीस हजार रुपये एसबीआई की चेम्बूर शाखा में डिपाजिट करने गए तो एक हजार के दो नोट नकली पाए गए। कारपोरेशन बैंक में शिकायत करने पर उन्हें अब तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला हैं।
भूल चूक या मिलीभगत बैंकों में नकली नोटों का होना दो ही बातें दर्शाता है। या तो कर्मचारियों की चूक से नकली नोट कैश काउंटर पर जमा हो जाते हैं, या उनकी मिली भगत रहती है। ग्राहक काउंटर पर जब कैश जमा करता है और उसमें कोई नकली नोट है तो बैंक कर्मी उस नोट को गड्डी से निकालकर रिजेक्ट कर देते हैं। मगर ऐसे ही नकली नोट जब एटीएम से निकलते हैं, तो शिकायत करने पर भी बैंक कर्मी यह मानने को तैयार नहीं होते।
कारपोरेशन बैंक की फोर्ट शाखा प्रबंधक टी वी शेनॉय का कहना है कि नकली नोटों से बचने के लिए ग्राहकों को स्वयं सावधानी बरतनी होगी। ग्राहक को नकली नोटों की पहचान के बारे में अनुभव प्राप्त करना जरूरी है। काउंटर से बाहर नोट जाने के बाद बैंक की गारंटी खत्म हो जाती है। एटीएम में नकली नोट पहुंचने के संबंध में कभी-कभी कर्मचारी से मानवीय भूल हो जाती है।
मुंबई पोलिस कमिशनर सत्यपाल सिंह ने कहा कि नकली नोटों के संबंध में जब भी कोई शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाती है। इसमें जो भी लिप्त हैं, उनके विरुद्ध कार्रवाई जरूर की जाएगी।
Corporation Bank 02222694204 Ambarishkumar Singh +919930220258
Thursday, July 18, 2013
सूचना टेक्नोलोजी एवं इंजीनियरिंग में अथर्वा कोलेज से प्रीती सोलंकी को सर्वश्रेष्ट प्रथम स्थान
अथर्वा कोलेज से प्रीती सोलंकी को सूचना टेक्नोलोजी एवं इंजीनियरिंग में सर्वश्रेष्ट प्रथम स्थान
मुम्बई, 18 जुलाई । मुम्बई यूनिवर्सिटी की ओर से ली गई बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग, सूचना टेक्नोलोजी फ़ाइनल वर्ष की परीक्षा में अथर्वा कालेज ऑफ़ इंजीनियरिंग मालाड का परिणाम शत-प्रतिशत रहा है। प्रिंसीपल श्रीकान्त कुल्लुरकर ने बताया कि प्रीती भरत सोलंकी 79.76 प्रतिशत 1193 अंक लेकर कालेज में प्रथम एवं मेघना शाह 1182 अंक लेकर द्वितीय स्थान पर रही। उन्होंने मेधावी छात्राओं को उम्दा प्रदर्शन के लिए बधाई दी है। मुंबई यूनिवर्सिटी द्वारा आज घोषित परिणाम में प्रीती सोलंकी ने 80 प्रतिशत हासिल करते हुए हर वर्ष की भांति अथर्वा कोलेज ऑफ इंजिनियरिंग में इस वर्ष भी प्रथम स्थान प्राप्त किया । प्रीती ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिजनों और गुरुवरो के आशीर्वाद को दिया है ।
मुम्बई, 18 जुलाई । मुम्बई यूनिवर्सिटी की ओर से ली गई बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग, सूचना टेक्नोलोजी फ़ाइनल वर्ष की परीक्षा में अथर्वा कालेज ऑफ़ इंजीनियरिंग मालाड का परिणाम शत-प्रतिशत रहा है। प्रिंसीपल श्रीकान्त कुल्लुरकर ने बताया कि प्रीती भरत सोलंकी 79.76 प्रतिशत 1193 अंक लेकर कालेज में प्रथम एवं मेघना शाह 1182 अंक लेकर द्वितीय स्थान पर रही। उन्होंने मेधावी छात्राओं को उम्दा प्रदर्शन के लिए बधाई दी है। मुंबई यूनिवर्सिटी द्वारा आज घोषित परिणाम में प्रीती सोलंकी ने 80 प्रतिशत हासिल करते हुए हर वर्ष की भांति अथर्वा कोलेज ऑफ इंजिनियरिंग में इस वर्ष भी प्रथम स्थान प्राप्त किया । प्रीती ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिजनों और गुरुवरो के आशीर्वाद को दिया है ।
Saturday, April 6, 2013
लोकप्रिय समाजसेवी मीठालाल बोराणा का निधन
लोकप्रिय समाजसेवी मीठालाल बोराणा का निधन
पाली-मारवाड़,६ अप्रेल । व्यापार व्यवसाय से निवृति लेकर पिछले दो दशक से भी अधिक समय से निरंतर समाजसेवा में लीन मारवाड़ के लोकप्रिय समाजसेवी श्री मीठालाल बोराणा का ७८ वर्ष की उम्र में अपनी जन्म भूमि बागोल में आज अचानक दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया । श्री बोराणा पिछले कई सालो से जैनियों के पवित्र स्थल पालिताना, मारवाड़ के सोमेसर और मुंबई की मुलुंड सहित कई सामाजिक, शैक्षणिक और धार्मिक संस्थाओ से जुड़े रहते हुए पुरे समाज को सेवा दे रहे थे। अपनी जन्मभूमि के प्रति अपने प्रेम और लगाव के रहते मारवाड़ और उसके विकाश के लिए हमेशा तत्पर रहते थे | अंतिम पांच दिनों से बागोल में आयोजित सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रम में ही भाग लेकर मुंबई लौटने ही वाले थे की शनिवार की दोपहर अचानक दिल का दौरा पड़ा और अपने प्राण त्याग दिए।
श्री मीठालाल बोराणा राजस्थान जैन संघ मुलुंड मुंबई, पालिताना जैन तीर्थ एवं बागोल जैन संघ सहित मारवाड़ की कई संस्थाओ के प्रमुख पदों पर रहते हुए अपनी सेवा दे रहे थे उनके निधन से सिर्फ उनके परिवार को ही नहीं बल्कि पुरे समाज को बहुत बड़ी हानि हुई वे अपने पीछे पुत्र पौत्र सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गए । उन्होंने अपने जीवन को समाज के लिए अपनी सेवा के लिए खुद को हमेशा समर्पित रखा।
पाली-मारवाड़,६ अप्रेल । व्यापार व्यवसाय से निवृति लेकर पिछले दो दशक से भी अधिक समय से निरंतर समाजसेवा में लीन मारवाड़ के लोकप्रिय समाजसेवी श्री मीठालाल बोराणा का ७८ वर्ष की उम्र में अपनी जन्म भूमि बागोल में आज अचानक दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया । श्री बोराणा पिछले कई सालो से जैनियों के पवित्र स्थल पालिताना, मारवाड़ के सोमेसर और मुंबई की मुलुंड सहित कई सामाजिक, शैक्षणिक और धार्मिक संस्थाओ से जुड़े रहते हुए पुरे समाज को सेवा दे रहे थे। अपनी जन्मभूमि के प्रति अपने प्रेम और लगाव के रहते मारवाड़ और उसके विकाश के लिए हमेशा तत्पर रहते थे | अंतिम पांच दिनों से बागोल में आयोजित सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रम में ही भाग लेकर मुंबई लौटने ही वाले थे की शनिवार की दोपहर अचानक दिल का दौरा पड़ा और अपने प्राण त्याग दिए।
श्री मीठालाल बोराणा राजस्थान जैन संघ मुलुंड मुंबई, पालिताना जैन तीर्थ एवं बागोल जैन संघ सहित मारवाड़ की कई संस्थाओ के प्रमुख पदों पर रहते हुए अपनी सेवा दे रहे थे उनके निधन से सिर्फ उनके परिवार को ही नहीं बल्कि पुरे समाज को बहुत बड़ी हानि हुई वे अपने पीछे पुत्र पौत्र सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गए । उन्होंने अपने जीवन को समाज के लिए अपनी सेवा के लिए खुद को हमेशा समर्पित रखा।
Saturday, December 29, 2012
भारत की प्रमुख 500 कंपनियों की सूचि में राजस्थान के मारवाड़ से दो
हाल ही में प्रकाशित इकोनोमिक टाइम्स द्वारा जारी भारत की प्रमुख 500
कंपनियों की सूचि में राजस्थान के मारवाड़, मेवाड़, हाड़ोती और शेखावटी
क्षेत्र से आये व्यापारी बन्धुओ की कुल कितनी कंपनिया हैं यह कहना आसान तो
नहीं हैं लेकिन मारवाड़ से दो कंपनियों के नाम जरुर गिनाये जा सकते हैं
जिनमे टेक्सटाइल से नाकोडा और स्टिल उद्योग से वरुण इंडस्ट्री का नाम
प्रमुख हैं। पुरे भारत की 500 प्रमुख कंपनियों की सूचि में राजस्थान से
करीब 50 कंपनिया होगी तो मारवाड़ से केवल दो नाम का होना शर्म की बात तो हैं
पर ऐसा हैं तो क्यों ?
मारवाड़ के व्यापारी बन्धुओ का पब्लिक भागीदारी में विश्वास की कमी के कारण ही 500 की सूचि में सिर्फ दो नाम हैं लेकिन क्या आने वाली पीढ़िया इस बात के लिए हमें माफ़ कर पायेगी आज हम अपने बच्चो को ग्रेजुशन पढाई लिखाई पूरी करवाकर नौकरी की प्रेरणा दे रहे हैं क्योंकि हमें मालूम हैं की यह पढ़े लिखे युवा पारंपरिक तरीके से तो व्यापर करेंगे नहीं और कोरपोरेट व्यापार के लिए इतनी पूंजी हैं नहीं। आज कोरपोरेट व्यापार के लिए कम से कम सौ करोड़ की पूंजी की आवश्यकता हैं और उतनी पूंजी हमारे मारवाड़ के लोग अपनी पूरी जिन्दगी में नहीं जुटा पाए इसलिए आज व्यापारी खानदान के बच्चो को नौकरी की प्रेरणा दे रहे हैं। अगर समय रहते हमारा विश्वास भागीदारी और इक्विटी पर मजबूत नहीं हुआ तो एक जनरेशन का नौकरी में चले जाने पर अगली तीन चार पीढ़िया भी वापस कभी उद्योग व्यापार में नहीं आ सकती हैं। इक्विटी इवेस्टमेंट में भरोसा ही आने वाली जनरेशन के लिए कोर्पोरेट जगत में स्थान बना सकता हैं । व्यापारी जब तक अपने आप को एक अच्छा इन्वेस्टर नहीं बना सकता हैं तब तक कॉर्पोरेट जगत में अपने आपको कभी भी स्थापित नहीं कर सकते हैं।
मारवाड़ के व्यापारी बन्धुओ का पब्लिक भागीदारी में विश्वास की कमी के कारण ही 500 की सूचि में सिर्फ दो नाम हैं लेकिन क्या आने वाली पीढ़िया इस बात के लिए हमें माफ़ कर पायेगी आज हम अपने बच्चो को ग्रेजुशन पढाई लिखाई पूरी करवाकर नौकरी की प्रेरणा दे रहे हैं क्योंकि हमें मालूम हैं की यह पढ़े लिखे युवा पारंपरिक तरीके से तो व्यापर करेंगे नहीं और कोरपोरेट व्यापार के लिए इतनी पूंजी हैं नहीं। आज कोरपोरेट व्यापार के लिए कम से कम सौ करोड़ की पूंजी की आवश्यकता हैं और उतनी पूंजी हमारे मारवाड़ के लोग अपनी पूरी जिन्दगी में नहीं जुटा पाए इसलिए आज व्यापारी खानदान के बच्चो को नौकरी की प्रेरणा दे रहे हैं। अगर समय रहते हमारा विश्वास भागीदारी और इक्विटी पर मजबूत नहीं हुआ तो एक जनरेशन का नौकरी में चले जाने पर अगली तीन चार पीढ़िया भी वापस कभी उद्योग व्यापार में नहीं आ सकती हैं। इक्विटी इवेस्टमेंट में भरोसा ही आने वाली जनरेशन के लिए कोर्पोरेट जगत में स्थान बना सकता हैं । व्यापारी जब तक अपने आप को एक अच्छा इन्वेस्टर नहीं बना सकता हैं तब तक कॉर्पोरेट जगत में अपने आपको कभी भी स्थापित नहीं कर सकते हैं।
Monday, February 6, 2012
पाली जिले में रोहट के पास मांडावास में नए एयरपोर्ट के लिए प्रस्ताव
‘हवा’ में उड़ रहा है जोधपुर हवाई अड्डा !
जोधपुर, शहर में 46 किलोमीटर की परिधि से बाहर नए एयरपोर्ट के लिए वायुसेना एनओसी देने के लिए तैयार है, लेकिन यह मुद्दा फिलहाल तो प्रशासनिक स्तर पर ही सुलझता नहीं दिख रहा। तीन प्रमुख अफसर- संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर और जेडीए आयुक्त एयरपोर्ट की जगह को लेकर एकमत नहीं हैं, ऐसे में तीनों के बीच कोई तालमेल नजर नहीं आ रहा। राज्य सरकार को प्रस्ताव पर प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं। इन कारणों से सवाल खड़ा हो रहा है कि सूर्यनगरी में नए एयरपोर्ट के लिए गंभीर प्रयास हो भी रहे हैं या नहीं?
मांडावास के लिए भेजा है प्रस्ताव : "पाली जिले में रोहट के पास मांडावास में नए एयरपोर्ट के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। पाली रोड पर दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (डीएमआईसी) के तहत इंडस्ट्रियल रीजन प्रस्तावित है। इसलिए जोधपुर व पाली के बीच ही हवाई अड्डा स्थापित करना उचित रहेगा। राज्य सरकार ने भी रोहट के लिए प्रस्ताव भेजा है। इसके लिए डीएमआईसी फंड देने के लिए भी तैयार है। इसके अलावा अन्य प्रस्तावों पर भी विचार किया जा सकता है।" रमेश कुमार जैन, संभागीय आयुक्त
संभागीय आयुक्त का प्रस्ताव उचित नहीं : "संभागीय आयुक्त के प्रस्ताव को यदि माना जाता है तो नया एयरपोर्ट शहर से 70 किलोमीटर दूर स्थापित होगा, जहां पहुंचने में ही एक घंटा लगेगा। इतनी देर में तो दिल्ली पहुंचा जा सकता है। इससे लोगों को परेशानी होगी। पुराने एयरपोर्ट के विस्तार का प्रस्ताव एयरपोर्ट अथॉरिटी ने मान लिया है। इसके लिए नगर निगम से 265 बीघा जमीन मांगी गई है। वहीं नागौर रोड पर भी नया एयरपोर्ट स्थापित किया जा सकता है।" सिद्धार्थ महाजन, कलेक्टर
नागौर रोड ही उचित जगह : "नागौर रोड एजुकेशन हब के रूप में उभर रही है। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी व आयुर्वेद यूनिवर्सिटी के अलावा आईआईटी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (एनआईएफटी), फुटवियर डिजाइन एंड डवलपमेंट इंस्टीट्यूट (एफडीडीआई), साइंस पार्क आदि इस रोड पर ही स्थापित होंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए नागौर रोड पर भूमि तलाश रहे हैं। अन्य क्षेत्रों में 46 किलोमीटर का दायरा भी पूर्ण नहीं होगा।" रतन लाहोटी, जेडीए आयुक्त
Friday, February 3, 2012
जोधपुर एयरपोर्ट के लिए पाली मार्ग पर नई जगह तलास की मांग

जोधपुर एयरपोर्ट के लिए पाली मार्ग पर नई जगह तलास की मांग मारवाड़ जैन संघ मुंबई प्रमुख भरत सोलंकी ने केंद्र सरकार से की हैं| संघ का मानना हैं की पाली एक बहुत बड़ी औद्योगिक नगरी हैं एवं मुंबई से पाली कई व्यापारी बंधुओ का हवाई यात्रा द्वारा अकसर आना जाना रहता हैं और अगर जोधपुर एयरपोर्ट पाली मार्ग पर बनता हैं तो पाली और जोधपुर दोनों शहरों के व्यापारी बंधुओ के लिए यह सुविधाजनक होगा|
जोधपुर एयरफोर्स के नागौर रोड पर मेलावास गांगाणी में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए एनओसी नहीं देने पर अब जोधपुर विकास प्राधिकरण ने संभावित नई जगह की तलाश तेज कर दी है। जेडीए आयुक्त ने उपायुक्तों को 46 किलोमीटर के बाद की दूरी पर एयरपोर्ट के लिए सरकारी जमीन तलाशने की मुहिम में लगाया है। एयरपोर्ट के लिए शहर के चारों तरफ जमीन की तेजी से तलाश की जा रही है, ताकि नए सिरे से एयरफोर्स के समक्ष एनओसी के लिए आवेदन किया जा सके। हालांकि जोधपुर कलेक्टर का मानना है कि इतनी दूरी पर एयरपोर्ट बनाने के बजाय पुणो की तर्ज पर सिविल एयरपोर्ट के विस्तार पर विचार किया जा सकता है।
एयरफोर्स ने मुख्य सचिव को भेजे पत्र में बताया कि प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की कंट्रोल जोन की परिधि 46 किमी है, जो कि जोधपुर एयरफील्ड को कवर करती है। एयरफील्ड पर ऑपरेशनल गतिविधियों और लड़ाकू विमानों के संचालन की ट्रेंनिग की वजह से यह हवाई एरिया प्रतिबंधित है। प्रस्तावित एयरपोर्ट के नजदीक ही आर्मी का रन-वे भी है। इस वजह से वहां एनओसी नहीं दी जा सकती। मुख्य सचिव ने यह पत्र जेडीए आयुक्त को भेज अन्यत्र जमीन तलाश करने को कहा है।
एयरपोर्ट अथॉरिटी के निदेशक सुरेश बोरकर ने बताया कि शहर के बीच होने की वजह से सिविल एयरपोर्ट का विस्तार होना चाहिए, लेकिन अथॉरिटी को शहर से पचास किमी दूरी पर भी नया एयरपोर्ट बनाने पर कोई ऐतराज नहीं है। जल्द ही एक जमीन चिह्न्ति कर एयरपोर्ट अथॉरिटी टीम को बुलाकर दिखाई जाएगी। उसके बाद एयरफोर्स के समक्ष नए सिरे से एनओसी के लिए आवेदन किया जाएगा। यह भी तय नहीं है कि नई जगह के लिए एयरफोर्स एनओसी दे ही दे, इसलिए दूसरे विकल्प के बारे में विचार करने की जरूरत है। हालांकि कोई रास्ता निकालने के लिए एयरफोर्स, जेडीए, नगर निगम और एयरपोर्ट अथॉरिटी के अधिकारियों की जल्द बैठक की जाएगी।
सिद्धार्थ महाजन, कलेक्टर, जोधपुर के अनुसार नया एयरपोर्ट शहर से इतनी दूरी पर बनाया जाना आमजन व पर्यटकों के लिए काफी दुविधाजनक रहेगा। नागौर रोड पर प्रस्तावित एयरपोर्ट के लिए एनओसी नहीं मिली है, इसलिए वर्तमान सिविल एयरपोर्ट का विस्तार कर उसे इंटरनेशनल एयरपोर्ट में तब्दील करना चाहिए।
Tuesday, June 28, 2011
कुम्भलगढ़ का पानी खम्भात की खाड़ी में और मारवाड़ प्यासा

मारवाड़ की सादडी रेंज अधीनस्थ कुम्भलगढ़ वन्य जीव अभ्यारण्य की अरावली पर्वत श्रंखलाओं से निकलने वाली नदियों का पानी गुजरात की धरोई बांध से साबरमती का सफ़र करते हुए खम्भात की खाड़ी में मिल जाता हैं इधर मारवाड़ की तरफ बहने वाली नदियों का पिछले साठ सालो में राजा महाराजाओ की रियासतों के बाद नदी नालो के बीच मौजूदा प्राकृतिक झील-झरोखों की साफ सफाई करवाना उचित नहीं समजा गया जिसके कारण मारवाड़ इलाके की प्राकृतिक झीलों में मिटटी, रेती और पत्थर की भरती जमा हो गई और पानी का इस्तर सेकडो मिल नीचे चला गया जिसके चलते बारिश के दिनों में जो भी थोडा बहुत पानी मारवाड़ की तरफ उतरता हैं वो सीधा मैदानी इलाको में जाकर व्यर्थ बह जाता हैं और पूरा मारवाड़ प्यासा का प्यासा रह जाता हैं ।
गूगल मेप में किये गये एक सर्वेक्षण के आधार पर मिली जानकारी के अनुसार कुम्भलगढ़ के आस पास पर्वतीय शृंखलाओ में बारिश के दिनों में एकत्रित होने वाला पानी मेवाड के रास्ते सायरा गोगुन्दा होते हुए गुजरात के धरोई बांध को पानी की भरपूर आपूर्ति करता हैं और धरोई बांध से निकलने वाली नदी आगे चल कर साबरमती नदी बन जाती हैं और आखिर में यह पानी खम्भात की खाड़ी में होते हुए समुद्र में विलीन हो जाता हैं ।
मारवाड़ के सिरियारी, फुलाद, जोजावर, कोट, बागोल, सुमेर, देसुरी, घाणेराव, सादडी, लुनावा और पिण्डवाडा आदि गाँवो की तरफ आने वाली नदियों के मुख्य स्रोत के बीच इन प्राकृतिक झीलों के निशान गूगल मेप में स्पष्ट देखे जा सकते हैं जो समुद्र तल से करीब तीन हजार फीट ऊपर स्थित कुम्भलगढ़, दीवेर, राणकपुर, सायरा और गोगुन्दा की अरावली पर्वतीय श्रंखलाओ में आसानी से देखे जा सकते हैं ।
मारवाड़ में हायवे सड़क निर्माण का कार्य सरकार शरू कर चुकी हैं जिसमे लगने वाली वाली सामग्री में रेती, मिटटी और कोंक्रिट की आपूति के लिए पंचायतो की मदद से निजी ठेकेदारों को नियुक्त कर इन नदी नालो के ऊपर स्थित झीलों में से यह सामग्री उपलब्ध कराई जा सकती हैं जिससे अरावली में पानी की संग्रहण क्षमता बढ़ेगी । पानी का अपना खुद का स्वभाव ही ऐसा हैं की वह अपना स्तर कभी नहीं छोड़ता हैं वह धरती पर हर वक्त अपने लेवल पर हमेशा मौजूद रहता हैं बशर्ते उसके मार्ग में आने वाली रूकावटो को खोला जाए और पर्वतो में मौजूद इन प्राकृतिक झीलों को खुला कर देने का मतलब अरावली में हरियाली एवं मारवाड़ का विकास ।
गूगल मेप में किये गये एक सर्वेक्षण के आधार पर मिली जानकारी के अनुसार कुम्भलगढ़ के आस पास पर्वतीय शृंखलाओ में बारिश के दिनों में एकत्रित होने वाला पानी मेवाड के रास्ते सायरा गोगुन्दा होते हुए गुजरात के धरोई बांध को पानी की भरपूर आपूर्ति करता हैं और धरोई बांध से निकलने वाली नदी आगे चल कर साबरमती नदी बन जाती हैं और आखिर में यह पानी खम्भात की खाड़ी में होते हुए समुद्र में विलीन हो जाता हैं ।
मारवाड़ के सिरियारी, फुलाद, जोजावर, कोट, बागोल, सुमेर, देसुरी, घाणेराव, सादडी, लुनावा और पिण्डवाडा आदि गाँवो की तरफ आने वाली नदियों के मुख्य स्रोत के बीच इन प्राकृतिक झीलों के निशान गूगल मेप में स्पष्ट देखे जा सकते हैं जो समुद्र तल से करीब तीन हजार फीट ऊपर स्थित कुम्भलगढ़, दीवेर, राणकपुर, सायरा और गोगुन्दा की अरावली पर्वतीय श्रंखलाओ में आसानी से देखे जा सकते हैं ।
मारवाड़ में हायवे सड़क निर्माण का कार्य सरकार शरू कर चुकी हैं जिसमे लगने वाली वाली सामग्री में रेती, मिटटी और कोंक्रिट की आपूति के लिए पंचायतो की मदद से निजी ठेकेदारों को नियुक्त कर इन नदी नालो के ऊपर स्थित झीलों में से यह सामग्री उपलब्ध कराई जा सकती हैं जिससे अरावली में पानी की संग्रहण क्षमता बढ़ेगी । पानी का अपना खुद का स्वभाव ही ऐसा हैं की वह अपना स्तर कभी नहीं छोड़ता हैं वह धरती पर हर वक्त अपने लेवल पर हमेशा मौजूद रहता हैं बशर्ते उसके मार्ग में आने वाली रूकावटो को खोला जाए और पर्वतो में मौजूद इन प्राकृतिक झीलों को खुला कर देने का मतलब अरावली में हरियाली एवं मारवाड़ का विकास ।
Monday, November 22, 2010
Police gun down Coimbatore killer
Arrested for abduction and murder of 2 minors, the 23-yr-old was trying to flee
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Friday, November 12, 2010
Dam Development Project & Multinational Companies
देश की प्रगति में पानी की महत्वपूर्ण भूमिका
पानी किसी भी प्रदेश, शहर अथवा गांव के विकास के लिए मुलभुत आवश्यकता हैं ! मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, बंगलूरु अथवा कोई भी शहर को पानी मिलना अगर बंद हो जाए तो शहर में रहने वाले लोगो का शहर में रहना मुश्किल हो जाता हैं, ठीक वैसे ही गाँवो के विकास और खेती के लिए आवश्यक पानी का होना जरुरी हैं! पानी कुदरत की ओर से तो शहरों और गाँवो को समान रूप से मिलता हैं, पर शहर के लोगो को पेयजल की आपूर्ति के लिए शहरों के नजदीक जल संग्रह करने हेतु झीलों का निर्माण किया जाता हैं! पानी किसी भी शहर की लाइफ लाइन हैं वैसे ही गाँवो में खेती का उत्पादन पुरे प्रदेश अथवा देश की भुखमरी को मिटाने का एक मात्र जरिया हैं! आज देश की हजारो नदियों का लाखो करोडो गेलन पानी, जिसका समुचित संग्रह वितरण व्यवस्था नहीं होने के कारण व्यर्थ में ही बरबाद हो जाता हैं! अगर इस पुरे पानी की समुचित संग्रह वितरण व्यवस्था की जाए तो भारत पूरी दुनिया को खाध्य आपूर्ति करने सक्षम साबित हो सकता हैं ! अब तक हम बांध झीलों एवं नहरों के निर्माण के लिए सरकार पर निर्भर रहे पर सरकार की भी अपनी सीमाए होने के कारण जितना निर्माण होना चाहिये था उतना नहीं हो पाया पर अब सिर्फ सरकार के भरोसे बैठ कर काम चलने वाला नहीं हैं और इस तरह तो और भी सेकडो साल निकल जायेंगे!
महाराष्ट्र देश में सहकारिता का उदाहरण हैं अगर सहकारिता के माध्यम से इस काम को पुरे देश में अंजाम दिया जाए तो अगले पांच साल में देश का पूरा नक्षा ही बदल सकता हैं| पूंजी निवेश के लिए मलटीनेशनल एवं निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ भागीदारी के माध्यम से देश भर में बांधो एवं झीलों का निर्माण और जल आपूर्ति की व्यवस्था की जाए तो वो दिन दूर नहीं जब भारत दुनिया की सबसे बड़ी ताकत के रूप में उभर कर सामने आये! सरकार को चाहिये की वह इस कार्य हेतु योजनाये बनाये और मलटीनेशनल एवं निजी क्षेत्र की देशी कंपनियों को बांध एवं झीलों के निर्माण कार्य के आमंत्रित करे!
महाराष्ट्र देश में सहकारिता का उदाहरण हैं अगर सहकारिता के माध्यम से इस काम को पुरे देश में अंजाम दिया जाए तो अगले पांच साल में देश का पूरा नक्षा ही बदल सकता हैं| पूंजी निवेश के लिए मलटीनेशनल एवं निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ भागीदारी के माध्यम से देश भर में बांधो एवं झीलों का निर्माण और जल आपूर्ति की व्यवस्था की जाए तो वो दिन दूर नहीं जब भारत दुनिया की सबसे बड़ी ताकत के रूप में उभर कर सामने आये! सरकार को चाहिये की वह इस कार्य हेतु योजनाये बनाये और मलटीनेशनल एवं निजी क्षेत्र की देशी कंपनियों को बांध एवं झीलों के निर्माण कार्य के आमंत्रित करे!
Sumer Duariya Bandh Dam Project
पाली (राज)। राजस्थान के मारवाड़ अंचल में स्थित अरावली की गोद में आदिवासी बहुल पाली जिले क़ी दुआरिया नदी पर प्रस्तावित 'दुआरिया-बांध' परियोजना ३५ वर्षो के बाद भी अब तक सर्वेक्षण स्तर तक ही सिमित हैं। जबकि इस दौरान इसकी प्रस्तावित लागत १५ करोड़ से बढ़कर वर्त्तमान में १६५.८१ करोड़ रुपये हो गयी हैं।
प्रस्तावित दुआरिया बांध परियोजना के सर्वेक्षण का कार्य राजस्थान शासन के २ अक्तूबर १९६४ के आदेश के तहत प्रारंभ हुआ था और इसके सर्वेक्षण कार्य पर राज्य शासन अब तक सवा करोड़ रुपये से भी अधिक खर्च कर चूका हैं। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार यह परियोजना गत ३५ वर्षो से लंबित हैं। राज्य शासन ने १९७५ में एक अलग जोधपुर संभाग राज्य के जल संसाधन विभाग के तहत खोला था लेकिन इसे १९८८ में ग्रामीण जल यांत्रिकी सेवा के तहत हस्तांतरित कर दिया गया। जल संसाधन विभाग के तहत अब केवल एक उपसंभाग ही रह गया हैं और उसे भी अमले की कमी के कारण लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में मिला दिया गया हैं।
परियोजना के अनुसार राज्य शासन द्वारा दुआरिया बांध परियोजना को प्राथमिकता नहीं देने के कारण ही केंद्रीय जल आयोग द्वारा इस परियोजना की तकनिकी स्वीकृति तक नहीं मिल पायी हैं जबकि स्वीकृति मिलने के बाद भी इस इस परियोजना में लगभग दस वर्ष लगेंगे।
सूत्रों ने बताया की केंद्रीय जल आयोग को राज्य शासन द्वारा भेजे गये प्रतिवेदनो में परियोजना की लागत का प्राथमिक आकलन जून १९७७ को ३१.७५ करोड़ रुपये, १९८८ में ६२.८८ करोड़ रुपये, १९९५ में १२०.३० करोड़ रुपये था और अंतिम आकलन में इसकी लागत १७५.८१ करोड़ रुपये आंकी गयी हैं।
दुआरिया बांध परियोजना के लिए जंहा केंद्रीय जल आयोग से अनापति प्रमाण पत्र प्राप्त करने में सफलता नहीं मिली हैं वहीँ वन विभाग एवं पर्यावरण मंत्रालय से भी इसके स्वीकृति प्राप्त करना अधर में लटका हुआ हैं।
पाली जिला मुख्यालय से साठ कि.मी. और देसुरी पंचायत समिति से मात्र दस कि.मी. दूर सुमेर में प्रस्तावित दुआरिया बांध परियोजना के पक्के बांध क़ी ऊंचाई ४५ मीटर हैं कुल लम्बाई २८५.६१ मीटर हैं। इस परियोजना से पाली जिले क़ी ८५ हजार एकड़ और जोधपुर विभाग क़ी लगभग पांच सौ एकड़ से भी अधिक भूमि को वार्षिक सिंचाई सुविधा उपलब्ध होना प्रस्तावित हैं।
[राष्ट्रीय दैनिक 'नवभारत टाइम्स' मुंबई के १० अप्रेल २००० में प्रकाशित ''३५ साल में परियोजना कार्य सर्वेक्षण तक ही पहुँच पाया हैं'' से साभार]
प्रस्तावित दुआरिया बांध परियोजना के सर्वेक्षण का कार्य राजस्थान शासन के २ अक्तूबर १९६४ के आदेश के तहत प्रारंभ हुआ था और इसके सर्वेक्षण कार्य पर राज्य शासन अब तक सवा करोड़ रुपये से भी अधिक खर्च कर चूका हैं। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार यह परियोजना गत ३५ वर्षो से लंबित हैं। राज्य शासन ने १९७५ में एक अलग जोधपुर संभाग राज्य के जल संसाधन विभाग के तहत खोला था लेकिन इसे १९८८ में ग्रामीण जल यांत्रिकी सेवा के तहत हस्तांतरित कर दिया गया। जल संसाधन विभाग के तहत अब केवल एक उपसंभाग ही रह गया हैं और उसे भी अमले की कमी के कारण लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में मिला दिया गया हैं।
परियोजना के अनुसार राज्य शासन द्वारा दुआरिया बांध परियोजना को प्राथमिकता नहीं देने के कारण ही केंद्रीय जल आयोग द्वारा इस परियोजना की तकनिकी स्वीकृति तक नहीं मिल पायी हैं जबकि स्वीकृति मिलने के बाद भी इस इस परियोजना में लगभग दस वर्ष लगेंगे।
सूत्रों ने बताया की केंद्रीय जल आयोग को राज्य शासन द्वारा भेजे गये प्रतिवेदनो में परियोजना की लागत का प्राथमिक आकलन जून १९७७ को ३१.७५ करोड़ रुपये, १९८८ में ६२.८८ करोड़ रुपये, १९९५ में १२०.३० करोड़ रुपये था और अंतिम आकलन में इसकी लागत १७५.८१ करोड़ रुपये आंकी गयी हैं।
दुआरिया बांध परियोजना के लिए जंहा केंद्रीय जल आयोग से अनापति प्रमाण पत्र प्राप्त करने में सफलता नहीं मिली हैं वहीँ वन विभाग एवं पर्यावरण मंत्रालय से भी इसके स्वीकृति प्राप्त करना अधर में लटका हुआ हैं।
पाली जिला मुख्यालय से साठ कि.मी. और देसुरी पंचायत समिति से मात्र दस कि.मी. दूर सुमेर में प्रस्तावित दुआरिया बांध परियोजना के पक्के बांध क़ी ऊंचाई ४५ मीटर हैं कुल लम्बाई २८५.६१ मीटर हैं। इस परियोजना से पाली जिले क़ी ८५ हजार एकड़ और जोधपुर विभाग क़ी लगभग पांच सौ एकड़ से भी अधिक भूमि को वार्षिक सिंचाई सुविधा उपलब्ध होना प्रस्तावित हैं।
[राष्ट्रीय दैनिक 'नवभारत टाइम्स' मुंबई के १० अप्रेल २००० में प्रकाशित ''३५ साल में परियोजना कार्य सर्वेक्षण तक ही पहुँच पाया हैं'' से साभार]
Monday, October 25, 2010
गोडवाड़ की धरोहर ; कोट सोलंकियान
पाली जिले में जैन संस्कृति कितनी प्राचीन है जिसके प्रमाण हमें यहां के मंदिरों से तो मिलते ही हैं लेकिन कुछ ऐसे भी स्थान हैं जहां बिखरे हुए प्राचीन भग्नावशेष भी इसके साक्षी है कि हजारों वर्ष पूर्व भी यहां जैन संस्कृति अपने पूर्ण वैभव पर थी। ऐसा ही एक स्थान है कोट सोलंकियान। वर्तमान कोट गांव के पास बहने वाली नदी के पार अरावली की टेकरियों के बीच 200 फुट लम्बे चौड़े पत्थर से चुने गए विशाल चबूतरे पर विशाल मंदिर के खण्डहर जिसमें जैन मंदिरों के भग्नावशेष और विशाल बावड़ियों से ज्ञात होता है कि कभी यहां जैनों की बड़ी नगरी थी। इस नगरी को आसलगढ़ दुर्ग पाटण के नाम से पुकारा जाता था जिसमें पांच मंदिर और चार बावड़ियां थी। इसलिये इसको कोट पंचतीर्थी के नाम से आज भी पुकारा जाता है।
दुर्ग को कोट के नाम से भी कहा जाता है इसलिये इस अचल दुर्ग के ध्वंस हे जाने के बाद बसे नये गांव का नाम कोट रखा गया और नया गांव भी आज यहां आबाद है जो इसी गांव का एक भाग है। कोट गांव में भी एक जैन मंदिर बनवाया गया जिसमें चिन्तामणी पार्श्वनाथ की प्रतिमा स्थापित है, कोट के इस मंदिर का भी जीर्णोद्धार करवाकर उसे भव्य बनाया गया है। प्राचीन अचल दुर्ग की पंचतीर्थी के समान इसमें भी पांच मंदिर बनवाकर इसे पंचतीर्थी का रूप दिया गया है। कोट के नवनिर्मित मंदिर के दो द्वार रखे गये हैं जिनमें एक द्वार पूर्व दिशा में है जबकि मुख्य द्वार उत्तर दिशा में है। मंदिर में अचल दुर्ग के मंदिरों की प्राचीन प्रतिमाओं को यहां स्थापित किया गया है जिसमें एक प्रतिमा के बारे में कहा जाता है कि यह प्रतिमा दिन में अनेक भाव प्रदर्शित करती है। कोट गांव के पास अचल दुर्ग पाटण की पंचतीर्थी को दो हजार वर्ष पूर्व की बताई जाती है जो प्रकृति प्रकोप के कारण ध्वंस हुई थी मगर कुछ लोगों का मत यह भी है कि यह पंचतीर्थी भी सोमनाथ जाते हुये मोहम्मद गजनी की लूट तथा तोड़फोड़ की शिकार हुई है। इन पंचतीर्थी में से एक मंदिर का सभा मंडप और गर्भ गृह का कलापूर्ण द्वार आज भी वैसे ही विद्यमान है। इस स्थान का उत्खनन कार्य करवायें तो हजारों वर्ष पूर्व की संस्कृति की जानकारी मिल सकती है और गोडवाड़ क्षेत्र का दबा पड़ा इतिहास उजागर हो सकता है। यह गांव फुलाद-देसूरी मार्ग पर दिवेर (मेवाड़) जाने वाली सड़क पर स्थित है। यहां यात्रियों के लिये धर्मशाला की सुविधा प्राप्त है।
दुर्ग को कोट के नाम से भी कहा जाता है इसलिये इस अचल दुर्ग के ध्वंस हे जाने के बाद बसे नये गांव का नाम कोट रखा गया और नया गांव भी आज यहां आबाद है जो इसी गांव का एक भाग है। कोट गांव में भी एक जैन मंदिर बनवाया गया जिसमें चिन्तामणी पार्श्वनाथ की प्रतिमा स्थापित है, कोट के इस मंदिर का भी जीर्णोद्धार करवाकर उसे भव्य बनाया गया है। प्राचीन अचल दुर्ग की पंचतीर्थी के समान इसमें भी पांच मंदिर बनवाकर इसे पंचतीर्थी का रूप दिया गया है। कोट के नवनिर्मित मंदिर के दो द्वार रखे गये हैं जिनमें एक द्वार पूर्व दिशा में है जबकि मुख्य द्वार उत्तर दिशा में है। मंदिर में अचल दुर्ग के मंदिरों की प्राचीन प्रतिमाओं को यहां स्थापित किया गया है जिसमें एक प्रतिमा के बारे में कहा जाता है कि यह प्रतिमा दिन में अनेक भाव प्रदर्शित करती है। कोट गांव के पास अचल दुर्ग पाटण की पंचतीर्थी को दो हजार वर्ष पूर्व की बताई जाती है जो प्रकृति प्रकोप के कारण ध्वंस हुई थी मगर कुछ लोगों का मत यह भी है कि यह पंचतीर्थी भी सोमनाथ जाते हुये मोहम्मद गजनी की लूट तथा तोड़फोड़ की शिकार हुई है। इन पंचतीर्थी में से एक मंदिर का सभा मंडप और गर्भ गृह का कलापूर्ण द्वार आज भी वैसे ही विद्यमान है। इस स्थान का उत्खनन कार्य करवायें तो हजारों वर्ष पूर्व की संस्कृति की जानकारी मिल सकती है और गोडवाड़ क्षेत्र का दबा पड़ा इतिहास उजागर हो सकता है। यह गांव फुलाद-देसूरी मार्ग पर दिवेर (मेवाड़) जाने वाली सड़क पर स्थित है। यहां यात्रियों के लिये धर्मशाला की सुविधा प्राप्त है।
फुलाद-उदयपुर को जोड़ती रेल मार्ग की कहानी
भवन निर्माण की शालीन और अंग्रेजी शैली का प्रतीक हैं यह बंगला, जो अगर होता तो आज शायद बागोल का रेलवे स्टेशन के नाम से जाना जाता मगर सरकारी नीतियों में तबदीली के कारण इस गांव से गुजरने वाली रेलवे लाइन अरावली की पहाड़ियो के उस पर होती हुई उदयपुर ले जय गई, सो यह बंगला अब वन विभाग की चौकी के रूप में काम आ रह हैं । न केवल बागोल गांव बल्कि इस इलाके के हजारो बाशिंदों को यह पता नहीं होगा की यंहा से रेललाइन गुजरने वाली थी जो फुलाद से उदयपुर को जोड़ती होती । लेकिन अब यह मावली होते हुए उदयपुर जाती हैं, तो बीच में बागोल कंहा से आता। संवत १९७४ यानी बीसवी शताब्दी के दुसरे दशक में सन १९१० के आस पास यंहा से इस रेलमार्ग का प्रस्ताव था । रेलमार्ग के लिए पटरिया बिछाने से पहले की सारी तैयारिया पूरी कर ली गई थी सबुत के तौर पर इस इलाके की छोटी मोटी नदियों, नालो और ऐसे ही बालो पर बने समृद्ध पूल रेलमार्ग के प्रस्ताव की कहानिया कह रहे हैं। ये पुल इतने समृद्ध हैं कि बाद के बने कई जगहों के पुल टूटफुट गए, बह गए मगर वे आज भी जस के तस हैं। बागोल की उच्च माध्यमिक स्कूल के मुख्य द्वार के ठीक समक्ष स्थित प्रस्तावित रेलवे स्टेशन का यह भवन जिस तरह का बना हैं, वैसा गांव में कोई भी घर नहीं हैं। तब बंगले की शैली में बने इस भवन में अब जंगलात कर्मचारी बैठते हैं। रेल आने की कहानी सुनाते इस बंगले को याद करते गांव के बुजुर्ग आज भी आँखों में सुखद ख्वाब लेकर बताते हैं- 'रेल आती तो कितना अच्छा होता । बागोल का नक्षा ही बदल जाता'!
Sunday, October 24, 2010
इतिहास के आईने में बागोल की गाथा
आठवी सदी के आरम्भ में राजपूताने में एक नए युग का सूत्रपात हुआ। इस काल के सबसे मजबूत राजवंश मरुधर और गुर्जर प्रदेश के प्रतिहार, मेवाड के गुहिलोत, चितौड और कोटा के मौर्य, परमार, चौहान, नाग और चापा थे । परिवर्तित काल में भारत पर मुग़ल शासन के बाद अंग्रेजी राज से पूर्व राजपुताने की ऐतिहासिक थाती में परिवर्तन हुआ और एक नई संस्कृति का उदय हुआ, जो ठाकुर शाही की थी। राजा के नीचे इलाकाई और गाँव के ठाकुर। यह परंपरा भी आजादी के साथ सन 1947 के बाद ख़त्म हो गई। सन1952 में राजपुताना से राजस्थान का उदय हुआ, उसी राजपूताने की मारवाड़ रियासत और मेवाड रियासत के बीच झूलता रहा हैं पाली जिले का गाँव-बागोल।
बागोल का इतिहास 500 साल पुराना हैं । बागोल के संस्थापको के वंशजो के मुताबिक सन1515 में यानि संवत 1572 में इसकी स्थापना की जानकारी हैं। जानकारी के अनुसार विक्रम संवत 1232 में वरसिंह चौहान ने जब हतुन्डिया के सिंगा राठोड को मारकर बेडा के 42 गाँवो पर अधिकार कर लिया था, तब मेवाड में रूपनगर के ठाकुरों ने देसुरी और आस पास के गाँवो की यात्रा की थी। उसमे अन्य गाँवो का तो जिक्र हैं पर बागोल का कंही जिक्र नहीं हैं। चालीसा चौहानों के बडुओं की बहियों में स्पष्ट हैं की संवत1080 (सन 1023) में नाडोल में रामपाल चौहान का राज था । मगर बाद में 'बहेड़ा' (बेडा) के राव कर्मसिंह के ज़माने में विक्रम संवत1336 में मेवाड के सिसोदिया सद्रसिंह के हुए युद्ध के डेढ़ सौ साल बाद की घटनाओ में नव स्थापित गांव के रूप में 'बाघोल' ( बागोल) का कंही जिक्र हैं । इससे माना जाता हैं की बागोल सोलहवी शताब्दी की शुरुआत में ही बसा होगा ।
इतिहास के जानकार लोगो का कहना हैं की बागोल के संस्थापक सोलंकी परिवार के पूर्वज ठाकुर मेवाड के रूपनगर घराने से देसुरी आए,वंहा से डायलाना गए। रूपनगर और डायलाना का सफ़र उनका डेढ़ सौ साल से भी ज्यादा का रहा, डायलाना से निकले ठाकुर विरमदेव सोलंकी ने वरदिया गांव बसाया। वंहा जब भाइयो में सम्पति का बंटवारा हुआ, तो आज जंहा बागोल हैं, वह जमीन जिस भाई के हिस्से में आई उनका नाम था- केसुदास। केसुदास अपने भाइयो में छोटे थे वे एक बार वरदिया से शिकार पर निकले। सुमेर के आस पास जंगलो में जब वे विचर रहे थे, तो उनकी निगाह अचानक एक चमत्कारी द्रश्य पर पड़ी। अपने घोड़े को रोककर ठाकुर केसुदास वह नजारा हैरतभरी आँखों से देखने लगे। वे देख रहे थे कि एक मामूली सी बकरी बाघ से लड़ रही थी। बाघ उस बकरी के बच्चे को उठाकर ज्योंही मुडा तो बकरी ने लपककर सामने दोनों पैरो पर खड़ी रहकर आगे के दोनों पैर बाघ की आँखों में गडा दिए, पूरी ताकत से बकरी ने बाघ की दोनों आँखे फोड़ डाली। बाघ कराह उठा और बकरी के बच्चे को छोड़ दिया। छोटे ठाकुर केसुदास सोलंकी को लगा की इस जमीन में जरुर कोई देवी शक्ति हैं। यह जमीन उनके हिस्से में तो आई हुई थी ही, सो उनके मन में आया की क्यों न यंही अपनी जागीर बसाई जाए। वैसे भी, वरदिया में तो उन्हें ठाकुर की पदवी हासिल होनी ही नहीं थी, सो उसी दिन 'छुरी' रोपकर उन्होंने अपने ठिकाने की स्थापना की। इतिहास के जानकारों का मत हैं की तब अपनी शासनधारा की शुरुआत करने की परम्परा 'छूरी' रोपकर ही हुआ करती थी।
मगर, इसके अलावा एक और भी कथा सूनने में आती हैं जो इस प्रकार हैं - 'वरदिया के ठाकुर जब अरावली के जंगलो में शिकार पर आये तो उन्होंने देखा की एक बकरी और बाघ आपस में खेल रहे हैं। तो उन्हें लगा की जिस भूमि में इतनी शक्ति हो कि बाघ की ताकत को भी बकरी जैसा ममतामयी बना डाले, या कमजोर बकरी में भी बाघ के साथ खेलने की हिम्मत पैदा कर दे तो उनके मन में उस भूमि पर अपना राज स्थापित करने की बात आई और उन्होंने जो गाँव स्थापित किया, वह बागोल बना।' घट्नाए दोनों करीब-करीब एकसी ही हैं । पहली में लड़ने का वाकया हैं तो दूसरी में आपसी खेल की बात । मगर बाघ और बकरी, शिकार और साहस दोनों में समान रूप से आता हैं। कंही न कंही साम्य रखने वाली इन घटनाओ के भीतर ही 'बाघोल' (अब बागोल) नाम की सच्चाई छिपी हुई हैं करीब पांच सौ वर्ष पुरानी यह घटना आज भी लोगो को अपने गाँव के शौर्य, साहस और दया की प्रष्टभूमि वाले नाम-'बाघोल' की सार्थकता दर्शाती हैं । बागोल की रावलापोल, जो गाँव के बीचो-बीच स्थित हैं, के बाहर नीम के पेड़ के नीचे 'छुरी रोपण स्थान' पर आज भी पांच सौ वर्ष पुराने इस इतिहास के अवशेष मौजूद हैं। बागोल में यही एक मात्र ऐतिहासिक अवशेष नहीं हैं। रावलापोल के भीतर माता भवानी जिसे 'जोगमाया' भी कहा जाता हैं, उनका स्थान भी सदियों पुराना हैं, जिसे स्थापना काल का माना जाता हैं ।
बागोल का इतिहास 500 साल पुराना हैं । बागोल के संस्थापको के वंशजो के मुताबिक सन1515 में यानि संवत 1572 में इसकी स्थापना की जानकारी हैं। जानकारी के अनुसार विक्रम संवत 1232 में वरसिंह चौहान ने जब हतुन्डिया के सिंगा राठोड को मारकर बेडा के 42 गाँवो पर अधिकार कर लिया था, तब मेवाड में रूपनगर के ठाकुरों ने देसुरी और आस पास के गाँवो की यात्रा की थी। उसमे अन्य गाँवो का तो जिक्र हैं पर बागोल का कंही जिक्र नहीं हैं। चालीसा चौहानों के बडुओं की बहियों में स्पष्ट हैं की संवत1080 (सन 1023) में नाडोल में रामपाल चौहान का राज था । मगर बाद में 'बहेड़ा' (बेडा) के राव कर्मसिंह के ज़माने में विक्रम संवत1336 में मेवाड के सिसोदिया सद्रसिंह के हुए युद्ध के डेढ़ सौ साल बाद की घटनाओ में नव स्थापित गांव के रूप में 'बाघोल' ( बागोल) का कंही जिक्र हैं । इससे माना जाता हैं की बागोल सोलहवी शताब्दी की शुरुआत में ही बसा होगा ।
इतिहास के जानकार लोगो का कहना हैं की बागोल के संस्थापक सोलंकी परिवार के पूर्वज ठाकुर मेवाड के रूपनगर घराने से देसुरी आए,वंहा से डायलाना गए। रूपनगर और डायलाना का सफ़र उनका डेढ़ सौ साल से भी ज्यादा का रहा, डायलाना से निकले ठाकुर विरमदेव सोलंकी ने वरदिया गांव बसाया। वंहा जब भाइयो में सम्पति का बंटवारा हुआ, तो आज जंहा बागोल हैं, वह जमीन जिस भाई के हिस्से में आई उनका नाम था- केसुदास। केसुदास अपने भाइयो में छोटे थे वे एक बार वरदिया से शिकार पर निकले। सुमेर के आस पास जंगलो में जब वे विचर रहे थे, तो उनकी निगाह अचानक एक चमत्कारी द्रश्य पर पड़ी। अपने घोड़े को रोककर ठाकुर केसुदास वह नजारा हैरतभरी आँखों से देखने लगे। वे देख रहे थे कि एक मामूली सी बकरी बाघ से लड़ रही थी। बाघ उस बकरी के बच्चे को उठाकर ज्योंही मुडा तो बकरी ने लपककर सामने दोनों पैरो पर खड़ी रहकर आगे के दोनों पैर बाघ की आँखों में गडा दिए, पूरी ताकत से बकरी ने बाघ की दोनों आँखे फोड़ डाली। बाघ कराह उठा और बकरी के बच्चे को छोड़ दिया। छोटे ठाकुर केसुदास सोलंकी को लगा की इस जमीन में जरुर कोई देवी शक्ति हैं। यह जमीन उनके हिस्से में तो आई हुई थी ही, सो उनके मन में आया की क्यों न यंही अपनी जागीर बसाई जाए। वैसे भी, वरदिया में तो उन्हें ठाकुर की पदवी हासिल होनी ही नहीं थी, सो उसी दिन 'छुरी' रोपकर उन्होंने अपने ठिकाने की स्थापना की। इतिहास के जानकारों का मत हैं की तब अपनी शासनधारा की शुरुआत करने की परम्परा 'छूरी' रोपकर ही हुआ करती थी।
मगर, इसके अलावा एक और भी कथा सूनने में आती हैं जो इस प्रकार हैं - 'वरदिया के ठाकुर जब अरावली के जंगलो में शिकार पर आये तो उन्होंने देखा की एक बकरी और बाघ आपस में खेल रहे हैं। तो उन्हें लगा की जिस भूमि में इतनी शक्ति हो कि बाघ की ताकत को भी बकरी जैसा ममतामयी बना डाले, या कमजोर बकरी में भी बाघ के साथ खेलने की हिम्मत पैदा कर दे तो उनके मन में उस भूमि पर अपना राज स्थापित करने की बात आई और उन्होंने जो गाँव स्थापित किया, वह बागोल बना।' घट्नाए दोनों करीब-करीब एकसी ही हैं । पहली में लड़ने का वाकया हैं तो दूसरी में आपसी खेल की बात । मगर बाघ और बकरी, शिकार और साहस दोनों में समान रूप से आता हैं। कंही न कंही साम्य रखने वाली इन घटनाओ के भीतर ही 'बाघोल' (अब बागोल) नाम की सच्चाई छिपी हुई हैं करीब पांच सौ वर्ष पुरानी यह घटना आज भी लोगो को अपने गाँव के शौर्य, साहस और दया की प्रष्टभूमि वाले नाम-'बाघोल' की सार्थकता दर्शाती हैं । बागोल की रावलापोल, जो गाँव के बीचो-बीच स्थित हैं, के बाहर नीम के पेड़ के नीचे 'छुरी रोपण स्थान' पर आज भी पांच सौ वर्ष पुराने इस इतिहास के अवशेष मौजूद हैं। बागोल में यही एक मात्र ऐतिहासिक अवशेष नहीं हैं। रावलापोल के भीतर माता भवानी जिसे 'जोगमाया' भी कहा जाता हैं, उनका स्थान भी सदियों पुराना हैं, जिसे स्थापना काल का माना जाता हैं ।
Sunday, October 17, 2010
श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ भगवान की अदभुत मूर्ति
राजस्थान के ऐतिहासिक मंदिरों में विशेष स्थान रखने वाला बागोल पुनर्निर्मित मंदिर, दुनिया भर में बागोल ही एकमात्र ऐसा ज्ञात स्थान हैं जंहा श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ भगवान की अदभुत मूर्ति हैं अगर इसे गौर से देखे तो दुनिया भर की भगवान पार्श्वनाथ की मूर्तियों से यह मूर्ति कई मायनों में भिन्न नजर आएगी लेकिन सबसे प्रमुख और स्पष्ट भिन्नता यह हैं की मूर्ति के दोनों कंधो से ऊपर उठे हुए दो नाग फन काढे हुए हैं जो पीछे खड़े शेषनाग के फन को सहारा देते हुए लगते हैं सामान्य तौर पर जो भी मुर्तिया देखी गई हैं उनमे भगवान पार्स्वनाथ के छत्र बने शेषनाग को अकेले ही दर्शाया गया हैं जैन ग्रंथो में भी ऐसी विशिष्ठ मूर्ति का कंही उल्लेख नहीं हैं बागोल में साठ साल पहले प्रतिष्टित यह मूर्ति आठवी या नौवी यानि कम से कम अग्यारह या बारह्सो वर्ष पुराणी प्राचीन और चमत्कारिक मूर्ति हैं ।शुद्ध सोने के रंग में शोभायमान पुनर्निर्मित यह स्वर्ण मंदिर आज राजस्थान के इतिहास में एकमात्र मंदिर हैं जो श्री स्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन संघ द्वारा पुनः प्रतिष्ठापित मंदिर हैं ।
Thursday, October 14, 2010
NO JAIN TEMPLE WAS BURNT IN KASHMIR: OFFICIALS
NO JAIN TEMPLE WAS BURNT IN KASHMIR: OFFICIALS
The temporary structure housing a Jain temple in a local hotel was not burnt by a mob but was dismantled as a local hotel's contract with a Mumbai-based travel agency which built the structure on its premises has not been renewed. In the wake of reports in newspapers around India that the only Jain temple in Kashmir had been burnt by mobs leading the ongoing protests in the Valley, hotel and State officials told that no such incident had taken place. According to Ghulam Mohiuddin, manager of Silver Star Hotel in Lasjan on the outskirts of Srinagar, the temporary structure was built as per contract with Gem Tours and Travels, a Mumbai-based travel agency, which wanted to provide a place where Jain tourists from other parts of India could worship while visiting Kashmir. But the three-year contract ended and was not extended, so the structure was also dismantled, he said. The temple was established to attract Jain tourists. “As the situation in the Valley worsened and the tourist inflow declined, the contract was not renewed and we thought there is no need for this,” he added. The 8x8 pre-fabricated structure was dismantled in the presence of the priest, Hans Raj, on August 10.
Mr. Mohiuddin categorically denied that the temple was burnt or destroyed by a mob. “This is just not true. It is a fact that a large mob passed through this area also but no one entered our premises so the question of touching the temple does not arise,” he told The Hindu. Before the hotel management decided to remove the structure, the owners of the travel agency were contacted through the priest Hans Raj, who hails from Uttar Pradesh. “The idols were removed and properly handed over to them when they arrived in Srinagar the next day,” he said, adding the rumours seemed to be a conspiracy to spread hatred against Kashmiris. Deputy Commissioner (Srinagar) Meraj Kakroo also rubbished reports about the Jain temple being attacked. “The report about the burning of the temple is baseless and mischievous,” he said. He added that no proper temple existed and “as per our information, it was an internal arrangement made by the hotel owners.” Members of the community said there is, in fact, no Jain temple in Kashmir. While there were 40-odd Jain families living in the Valley prior to militancy, only five have stayed back. “There is no Jain temple here, though a family has set up one in their house,” Amit Jain, a businessman, said. Doshi family, which built the temple, flew in to Srinagar the day after the temple was dismantled and packed the idols in cardboard boxes and returned to Sabarmati.
Ahimsa Foundation feels that Jain Samaj should restrain in expressing its reactions and views in delicate religious and political matters affecting the feelings of other communities.
The temporary structure housing a Jain temple in a local hotel was not burnt by a mob but was dismantled as a local hotel's contract with a Mumbai-based travel agency which built the structure on its premises has not been renewed. In the wake of reports in newspapers around India that the only Jain temple in Kashmir had been burnt by mobs leading the ongoing protests in the Valley, hotel and State officials told that no such incident had taken place. According to Ghulam Mohiuddin, manager of Silver Star Hotel in Lasjan on the outskirts of Srinagar, the temporary structure was built as per contract with Gem Tours and Travels, a Mumbai-based travel agency, which wanted to provide a place where Jain tourists from other parts of India could worship while visiting Kashmir. But the three-year contract ended and was not extended, so the structure was also dismantled, he said. The temple was established to attract Jain tourists. “As the situation in the Valley worsened and the tourist inflow declined, the contract was not renewed and we thought there is no need for this,” he added. The 8x8 pre-fabricated structure was dismantled in the presence of the priest, Hans Raj, on August 10.
Mr. Mohiuddin categorically denied that the temple was burnt or destroyed by a mob. “This is just not true. It is a fact that a large mob passed through this area also but no one entered our premises so the question of touching the temple does not arise,” he told The Hindu. Before the hotel management decided to remove the structure, the owners of the travel agency were contacted through the priest Hans Raj, who hails from Uttar Pradesh. “The idols were removed and properly handed over to them when they arrived in Srinagar the next day,” he said, adding the rumours seemed to be a conspiracy to spread hatred against Kashmiris. Deputy Commissioner (Srinagar) Meraj Kakroo also rubbished reports about the Jain temple being attacked. “The report about the burning of the temple is baseless and mischievous,” he said. He added that no proper temple existed and “as per our information, it was an internal arrangement made by the hotel owners.” Members of the community said there is, in fact, no Jain temple in Kashmir. While there were 40-odd Jain families living in the Valley prior to militancy, only five have stayed back. “There is no Jain temple here, though a family has set up one in their house,” Amit Jain, a businessman, said. Doshi family, which built the temple, flew in to Srinagar the day after the temple was dismantled and packed the idols in cardboard boxes and returned to Sabarmati.
Ahimsa Foundation feels that Jain Samaj should restrain in expressing its reactions and views in delicate religious and political matters affecting the feelings of other communities.
Sunday, September 5, 2010
Ashtapad Tirth Parvat
Saturday, February 13, 2010
मंदिर ट्रस्टो के चुनाव लोकतान्त्रिक प्रणाली से कराने की मांग
मुंबई | मारवाड़ जैन संघ मुंबई प्रमुख भरत सोलंकी ने राजस्थान के देवस्थान विभाग आयुक्त एवं पाली जिला कलेक्टर को पत्र लिख कर जिले के अनेक गाँवो में मंदिरों के प्रबंधन समितिओ का चुनाव लोकतान्त्रिक प्रणाली से कराने एवं देवस्थान विभाग में पंजीकृत करने के लिए उचित कार्यवाही करने की मांग की हैं | मंदिर ट्रस्ट व्यवस्थापन समितियो का देवस्थान विभाग में पंजीकरण नहीं होने के कारण कई गावो में चढ़ावे की बोलियो की करोडो रुपये की रकम के हिसाब किताब में पारदर्शिता नहीं होने से धन का सदुपयोग नहीं हो रहा हैं और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता हैं | प्रवासी श्रद्धालु अपनी मेहनत की कमाई से अर्जित धन से गाँव में स्वयं का मकान बनवाकर एवं देवस्थान में चढ़ावा लेकर अपनी प्रतिष्ठा बढाने का प्रयास करते और फिर दक्षिण भारत की ओर पलायन कर जाते हैं पीछे देवस्थान पेढ़ी के तथाकतित स्वयंभू ट्रस्टी रकम को आपस में बाँट लेते हैं इस प्रकार विभिन्न मंदिरों के करोडो रुपये की हेरा फेरी होती हैं जिसकी जाँच करने वाला कोई नहीं हैं |
ज्ञात रहे सरकार का ध्यान आकर्षित करने पिछले मई महीने में एक महोत्सव समारोह के दौरान सोलंकी ने बागोल में तीन दिन का आमरण अनसन किया था जिसके परिणामस्वरुप राज्य सरकार के प्रशाशनिक सुधार विभाग उपशासन सचिव द्वारा जारी आदेश के अनुसार सभी मंदिरों को सरकारी नियंत्रण में शामिल करने की तैयारी कर दी हैं जिसके तहत राज्य के ग्रामीण अंचलो में स्थित राजकीय विज्ञापित मंदिरों के अतिरिक्त सभी अराजकीय मंदिरों, धार्मिक पूजा स्थलों के प्रबंधन एवं व्यवस्था के लिए प्रत्येक तहसील मुख्यालय पर स्थायी समिति का गठन कर लिया गया हैं | समिति अध्यक्ष उपखंड अधिकारी होंगे तथा उपाध्यक्ष तहसीलदार होंगे परन्तु ग्रामीण स्तर पर मंदिर ट्रस्टो के लोकतान्त्रिक प्रणाली से समितियो के चुनाव कराने एवं ट्रस्ट पंजीकरण के लिए बाध्य करने के बारे में अभी भी कोई विशेष तैयारी सरकार ने नहीं की हैं |
संघ प्रमुख भरत सोलंकी ने राजस्थान के सभी देवस्थान पेढ़ीयो की जाँच कराने के साथ ट्रस्टो के चुनाव शीघ्र ही कराने की मांग की हैं ताकि धार्मिक श्रद्धालुओ की भावनाओ का विश्वास कायम रहे और देवस्थान के धन का सदुपयोग हो सके |
ज्ञात रहे सरकार का ध्यान आकर्षित करने पिछले मई महीने में एक महोत्सव समारोह के दौरान सोलंकी ने बागोल में तीन दिन का आमरण अनसन किया था जिसके परिणामस्वरुप राज्य सरकार के प्रशाशनिक सुधार विभाग उपशासन सचिव द्वारा जारी आदेश के अनुसार सभी मंदिरों को सरकारी नियंत्रण में शामिल करने की तैयारी कर दी हैं जिसके तहत राज्य के ग्रामीण अंचलो में स्थित राजकीय विज्ञापित मंदिरों के अतिरिक्त सभी अराजकीय मंदिरों, धार्मिक पूजा स्थलों के प्रबंधन एवं व्यवस्था के लिए प्रत्येक तहसील मुख्यालय पर स्थायी समिति का गठन कर लिया गया हैं | समिति अध्यक्ष उपखंड अधिकारी होंगे तथा उपाध्यक्ष तहसीलदार होंगे परन्तु ग्रामीण स्तर पर मंदिर ट्रस्टो के लोकतान्त्रिक प्रणाली से समितियो के चुनाव कराने एवं ट्रस्ट पंजीकरण के लिए बाध्य करने के बारे में अभी भी कोई विशेष तैयारी सरकार ने नहीं की हैं |
संघ प्रमुख भरत सोलंकी ने राजस्थान के सभी देवस्थान पेढ़ीयो की जाँच कराने के साथ ट्रस्टो के चुनाव शीघ्र ही कराने की मांग की हैं ताकि धार्मिक श्रद्धालुओ की भावनाओ का विश्वास कायम रहे और देवस्थान के धन का सदुपयोग हो सके |
Monday, February 1, 2010
पाली पंचायत चुनाव तैयारी पूरी
पाली। पंचायत चुनाव के तीसरे व अंतिम चरण में जिला परिषद की 12 व तीन पंचायत समितियों मारवाड जंक्शन, सुमेरपुर व जैतारण की 67 सीटों के लिए मतदान मंगलवार सुबह आठ से शाम पांच बजे तक होगा। तीसरा चरण पूरा होने के बाद जिला परिषद की सभी 33 व दस पंचायत समितियों की 192 सीटों की मतगणना 8 फरवरी को जिला मुख्यालय पर होगी व इसके बाद परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।
मतदाता 3.82 लाख, मतदान केंद्र 421:जिला परिषद की मारवाड जंक्शन समिति क्षेत्र की 5, सुमेरपुर क्षेत्र की 3 व जैतारण क्षेत्र की 4 सीटों के लिए मतदान तीसरे चरण में होना है। इसी तरह मारवाड जंक्शन पंचायत समिति की 25, सुमेरपुर की 19 व जैतारण की 23 सीटों के लिए मतदान होना है। इस चरण में 1,85,195 महिला मतदाताओं समेत कुल 3 लाख 82 हजार 337 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। इनके लिए 421 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं।
पंच-सरपंच के नामांकन कल:तीसरे चरण में तीन समिति क्षेत्र के 109 सरपंच व 1293 वार्डपंच पदों के लिए 3 फरवरी को सुबह 8 से 11 बजे तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। मतदान 4 फरवरी को सुबह आठ से शाम पांच बजे तक होगा। मतदान के बाद मतगणना कर परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।
सुमेरपुर। जिला परिषद व पंचायत समिति सदस्यों के मंगलवार को होने वाले चुनाव को लेकर 120 मतदान केन्द्र स्थापित किए गए हैं। पंचायत समिति के 19 और जिला परिषद के तीन सदस्यों के चुनाव में एक लाख 13 हजार 714 मतदाता अपने मताघिकार का उपयोग करेंगे। रिटर्निग अघिकारी नरेन्द्रकुमार बंसल ने बताया कि तृतीय चरण के चुनाव को लेकर सारी तैयारियां पूरी कर ली गई है।
शांतिपूर्ण चुनाव को लेकर सेक्टर मजिस्ट्रेट व जोनल मजिस्ट्रेट लगाए गए हैं। मतदान को लेकर दस संवेदनशील व चार अति संवेदनशील मतदान केन्द्र चिह्नित किए गए हैं। संवेदनशील के रूप में भारून्दा, नेतरा, ढोला, एरनपुरा, पोमावा, खिमाडा, कोसेलाव, बसंत, पावा और नोवी को चिन्हित किया गया। वहीं साण्डेराव, सिन्दरू, बलाना व चाणोद को अतिसंवेदनशील केंद्र घोषित किया गया है।
मारवाड जंक्शन। पंचायतीराज संस्थाओं के मंगलवार को होने वाले चुनाव में मारवाड जंक्शन पंचायत समिति क्षेत्र में एक लाख 33 हजार 435 मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग कर जनप्रतिनिधि चुनेंगे। जिला परिषद सदस्यों व पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव को लेकर कुल 149 मतदान के न्द्र बनाए गए हैं। कुल एक लाख 33 हजार 435 मतदाताओं में से 26 हजार 877 अनुसूचित जाति एवं तीन हजार 434 अनुसूचित जाति के मतदाता है।
जैतारण। पंचायत समिति क्षेत्र की 33 पंचायतों में 33 मण्डल सदस्य एवं चार जिला परिषद सदस्यों के लिए चुनाव होंगे। इसके लिए एक लाख 34 हजार 501 मतदाता अपने मताघिकार का उपयोग करेंगे। इनमें 68 हजार 953 पुरूष व 65 हजार 548 महिलाएं मतदान करेंगी।
जैतारण। पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई। सोमवार को मतदान दल केंद्रों पर पहुंचे। इससे पहले उपखण्ड कार्यालय में जेडओ व सेक्टर मजिस्टे्रटों की बैठक आयोजित हुई। इसमें शांतिपूर्ण मतदान कराने के संबंध में निर्देश दिए गए।
अति संवेदनशील मतदान केन्द्र फालका, डिगरना, बलुन्दा, पाटवा, निमाज, बेडकलां, रास, राबडियावास, भुम्बलिया, कुडकी, लाम्बिया, आन्दपुरकालू में सशस्त्र आरएसी के जवान तैनात रहेंगे। रिटर्निüग अघिकारी हरफूलसिंह यादव के अनुसार चार एरिया मजिस्ट्रेट पूरे दिन क्षेत्र मे मौजूद रहेंगे।
मारवाड जंक्शन। प्रशासन ने पंचायतीराज संस्थाओं के तीसरे चरण के चुनाव सम्पन्न करवाने के लिए तैयारियां पूरी कर ली है। पुलिस थाने में सोमवार को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं पंचायत समिति चुनाव प्रभारी प्रताप सिंह के नेतृत्व में पुलिस अघिकारियों की बैठक आयोजित हुई।
इसमें शांतिपूर्ण, निष्पक्ष, भय रहित चुनाव सम्पन्न करवाने के निर्देश दिए गए। इसमें पुलिस उप अधीक्षक सोजत सुनिल गुप्ता, पी.डी.धानिया, थाना प्रभारी खलील अहमद आदि ने भाग लिया।
रायपुर मारवाड। पंचायतराज संस्थाओं के द्वितीय चरण के चुनाव सम्पन्न करवाने के बाद मतदान दलों ने तृतीय चरण के चुनाव के लिए जैतारण की ओर रूख कर दिया। वे बसों के जरिए मतदान केंद्रों पर पहुंचे।
पंचायत समिति में लगा मेला:पंच-सरपंच चुनाव के बाद चुनाव सामग्री तथा संबंधित दस्तावेज जमा कराने को पंचायत समिति में मतदान दलों का मेला सा लगा रहा। उन्होंने कतार में खडे रहकर मतदान सामग्री जमा करवाई। वहीं एक छोर से मतदान कार्मिकों ने तृतीय चरण की मतदान सामग्री प्राप्त की।
जिला मुख्यालय पहुंचा रिकॉर्ड: द्वितीय चरण का चुनावी रिकॉर्ड सोमवार शाम बाद अतिरिक्त जिला निर्वाचन अधिकारी अरूण पुरोहित के नेतृत्व में जिला मुख्यालय के लिए रवाना किया गया। इधर पुरोहित ने तृतीय चरण के चुनाव के लिए जैतारण रवाना हुए दलों को नियमों की पालना के निर्देश दिए।
बूथों पर पहुंची मतदान टोलियां, तखतगढ। सुमेरपुर पंचायत समिति के 29 ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर मतदान दल पहुंच गए हैं। सुरक्षा की दृष्टि से कडे बंदोबस्त किए गए हैं। बाली अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं प्रभारी सुरेशचंद्र पंडया ने बताया कि इन चुनावों में बाली उप अधीक्षक मोहनलाल, सुमेरपुर उप अधीक्षक पूरणसिंह भाटी एवं जोधपुर के आरएसी बटालियन के उप अधीक्षक भंवरलाल मुंडेल सहित क्षेत्र के थाना प्रभारी तैनात रहेंगे। थाना प्रभारी ताराराम बैरवा ने बताया कि सोमवार को संवेदनशील एवं अति संवेदनशील क्षेत्रों का दौरा कर जायजा लिया। वही बसंत में अतिरिक्त सुरक्षा केन्द्र बनाया गया है।
मतदान केन्द्रों पर पहुंचे चुनावकर्मी,सोजत । दूसरे चरण का मतदान कराने के बाद मतदान दलों ने सोजत पहुंच राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में मतदान सामग्री जमा कराई। बाद में नई सामग्री व मतपेटियां लेकर तीसरे चरण का मतदान कराने के लिए रवाना हो गए। उपखंड अघिकारी भागीरथ विश्नोई व तहसीलदार राजेश डागा ने जोनल मजिस्ट्रेट्स की बैठक लेने के बाद मतदान दलों को जैतारण व मारवाड जंक्शन समिति क्षेत्रों के लिए रवाना किया। अपने-अपने मतदान केन्द्र पहुंचने के बाद वहां व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया।
मतदाता 3.82 लाख, मतदान केंद्र 421:जिला परिषद की मारवाड जंक्शन समिति क्षेत्र की 5, सुमेरपुर क्षेत्र की 3 व जैतारण क्षेत्र की 4 सीटों के लिए मतदान तीसरे चरण में होना है। इसी तरह मारवाड जंक्शन पंचायत समिति की 25, सुमेरपुर की 19 व जैतारण की 23 सीटों के लिए मतदान होना है। इस चरण में 1,85,195 महिला मतदाताओं समेत कुल 3 लाख 82 हजार 337 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। इनके लिए 421 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं।
पंच-सरपंच के नामांकन कल:तीसरे चरण में तीन समिति क्षेत्र के 109 सरपंच व 1293 वार्डपंच पदों के लिए 3 फरवरी को सुबह 8 से 11 बजे तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। मतदान 4 फरवरी को सुबह आठ से शाम पांच बजे तक होगा। मतदान के बाद मतगणना कर परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।
सुमेरपुर। जिला परिषद व पंचायत समिति सदस्यों के मंगलवार को होने वाले चुनाव को लेकर 120 मतदान केन्द्र स्थापित किए गए हैं। पंचायत समिति के 19 और जिला परिषद के तीन सदस्यों के चुनाव में एक लाख 13 हजार 714 मतदाता अपने मताघिकार का उपयोग करेंगे। रिटर्निग अघिकारी नरेन्द्रकुमार बंसल ने बताया कि तृतीय चरण के चुनाव को लेकर सारी तैयारियां पूरी कर ली गई है।
शांतिपूर्ण चुनाव को लेकर सेक्टर मजिस्ट्रेट व जोनल मजिस्ट्रेट लगाए गए हैं। मतदान को लेकर दस संवेदनशील व चार अति संवेदनशील मतदान केन्द्र चिह्नित किए गए हैं। संवेदनशील के रूप में भारून्दा, नेतरा, ढोला, एरनपुरा, पोमावा, खिमाडा, कोसेलाव, बसंत, पावा और नोवी को चिन्हित किया गया। वहीं साण्डेराव, सिन्दरू, बलाना व चाणोद को अतिसंवेदनशील केंद्र घोषित किया गया है।
मारवाड जंक्शन। पंचायतीराज संस्थाओं के मंगलवार को होने वाले चुनाव में मारवाड जंक्शन पंचायत समिति क्षेत्र में एक लाख 33 हजार 435 मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग कर जनप्रतिनिधि चुनेंगे। जिला परिषद सदस्यों व पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव को लेकर कुल 149 मतदान के न्द्र बनाए गए हैं। कुल एक लाख 33 हजार 435 मतदाताओं में से 26 हजार 877 अनुसूचित जाति एवं तीन हजार 434 अनुसूचित जाति के मतदाता है।
जैतारण। पंचायत समिति क्षेत्र की 33 पंचायतों में 33 मण्डल सदस्य एवं चार जिला परिषद सदस्यों के लिए चुनाव होंगे। इसके लिए एक लाख 34 हजार 501 मतदाता अपने मताघिकार का उपयोग करेंगे। इनमें 68 हजार 953 पुरूष व 65 हजार 548 महिलाएं मतदान करेंगी।
जैतारण। पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई। सोमवार को मतदान दल केंद्रों पर पहुंचे। इससे पहले उपखण्ड कार्यालय में जेडओ व सेक्टर मजिस्टे्रटों की बैठक आयोजित हुई। इसमें शांतिपूर्ण मतदान कराने के संबंध में निर्देश दिए गए।
अति संवेदनशील मतदान केन्द्र फालका, डिगरना, बलुन्दा, पाटवा, निमाज, बेडकलां, रास, राबडियावास, भुम्बलिया, कुडकी, लाम्बिया, आन्दपुरकालू में सशस्त्र आरएसी के जवान तैनात रहेंगे। रिटर्निüग अघिकारी हरफूलसिंह यादव के अनुसार चार एरिया मजिस्ट्रेट पूरे दिन क्षेत्र मे मौजूद रहेंगे।
मारवाड जंक्शन। प्रशासन ने पंचायतीराज संस्थाओं के तीसरे चरण के चुनाव सम्पन्न करवाने के लिए तैयारियां पूरी कर ली है। पुलिस थाने में सोमवार को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं पंचायत समिति चुनाव प्रभारी प्रताप सिंह के नेतृत्व में पुलिस अघिकारियों की बैठक आयोजित हुई।
इसमें शांतिपूर्ण, निष्पक्ष, भय रहित चुनाव सम्पन्न करवाने के निर्देश दिए गए। इसमें पुलिस उप अधीक्षक सोजत सुनिल गुप्ता, पी.डी.धानिया, थाना प्रभारी खलील अहमद आदि ने भाग लिया।
रायपुर मारवाड। पंचायतराज संस्थाओं के द्वितीय चरण के चुनाव सम्पन्न करवाने के बाद मतदान दलों ने तृतीय चरण के चुनाव के लिए जैतारण की ओर रूख कर दिया। वे बसों के जरिए मतदान केंद्रों पर पहुंचे।
पंचायत समिति में लगा मेला:पंच-सरपंच चुनाव के बाद चुनाव सामग्री तथा संबंधित दस्तावेज जमा कराने को पंचायत समिति में मतदान दलों का मेला सा लगा रहा। उन्होंने कतार में खडे रहकर मतदान सामग्री जमा करवाई। वहीं एक छोर से मतदान कार्मिकों ने तृतीय चरण की मतदान सामग्री प्राप्त की।
जिला मुख्यालय पहुंचा रिकॉर्ड: द्वितीय चरण का चुनावी रिकॉर्ड सोमवार शाम बाद अतिरिक्त जिला निर्वाचन अधिकारी अरूण पुरोहित के नेतृत्व में जिला मुख्यालय के लिए रवाना किया गया। इधर पुरोहित ने तृतीय चरण के चुनाव के लिए जैतारण रवाना हुए दलों को नियमों की पालना के निर्देश दिए।
बूथों पर पहुंची मतदान टोलियां, तखतगढ। सुमेरपुर पंचायत समिति के 29 ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर मतदान दल पहुंच गए हैं। सुरक्षा की दृष्टि से कडे बंदोबस्त किए गए हैं। बाली अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं प्रभारी सुरेशचंद्र पंडया ने बताया कि इन चुनावों में बाली उप अधीक्षक मोहनलाल, सुमेरपुर उप अधीक्षक पूरणसिंह भाटी एवं जोधपुर के आरएसी बटालियन के उप अधीक्षक भंवरलाल मुंडेल सहित क्षेत्र के थाना प्रभारी तैनात रहेंगे। थाना प्रभारी ताराराम बैरवा ने बताया कि सोमवार को संवेदनशील एवं अति संवेदनशील क्षेत्रों का दौरा कर जायजा लिया। वही बसंत में अतिरिक्त सुरक्षा केन्द्र बनाया गया है।
मतदान केन्द्रों पर पहुंचे चुनावकर्मी,सोजत । दूसरे चरण का मतदान कराने के बाद मतदान दलों ने सोजत पहुंच राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में मतदान सामग्री जमा कराई। बाद में नई सामग्री व मतपेटियां लेकर तीसरे चरण का मतदान कराने के लिए रवाना हो गए। उपखंड अघिकारी भागीरथ विश्नोई व तहसीलदार राजेश डागा ने जोनल मजिस्ट्रेट्स की बैठक लेने के बाद मतदान दलों को जैतारण व मारवाड जंक्शन समिति क्षेत्रों के लिए रवाना किया। अपने-अपने मतदान केन्द्र पहुंचने के बाद वहां व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया।
Monday, November 9, 2009
चोरों की गिरफ्तारी के लिए दिया धरना
सादडी। उपबस्ती बारली सादडी स्थित महाकाली मंदिर में गत माह हुई चोरी की वारदात नहीं खुलने से आक्रोशित मंदिर समिति पदाधिकारी व कस्बेवासियों ने सोमवार को मंदिर परिसर के बाहर पुलिस के खिलाफ धरना दिया। धरनार्थियों ने तीन दिन में वारदात के नहीं खुलने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
पुलिस व प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ब्रज भाटा चौक स्थित सडक मार्ग के किनारे सुबह साढे नौ बजे से लोगों के पहुँचने का सिलसिला शुरू हो गया। दोपहर तक नगर पालिकाध्यक्ष दिलीप सोनी, उपाध्यक्ष घीसाराम जाट, प्रतिपक्ष नेता ओमप्रकाश बोहरा, पार्षद राकेश मेवाडा, नथाराम भाटी, माता महाकाली मन्दिर विकास समिति के मांगीलाल सोलंकी, मूलाराम घांची, सहित सैकडों लोग वहां एकत्रित हो गए। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात करना पडा।
लोगों ने वहां धरना दिया और पुलिस की कार्रवाई पर रोष जताया। कांग्रेस नेता जयसिंह राजपुरोहित व धरनार्थियों ने बताया कि पुलिस ने तीन दिन में वारदात का खुलासा नहीं किया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। इसके बाद मन्दिर समिति के पदाघिकारी, कांग्रेस नेता व धरनार्थियों का प्रतिनिधिमण्डल थाने पहुंचा । उन्होंने सीओ बाली मोहनलाल खिन्नीवाल से आरोपियों का पता लगाने की मांग की। मारवाड जैन संघ मुंबई प्रमुख भरत सोलंकी ने सादडी के महाकाली, बागोल के चिंतामणि और सोजत के करणी माता मंदिर सहित जिले में हुई चोरी की कई वारदातों का पर्दाफाश नहीं करने के विरोध में पुलिस के खिलाफ धरना दे रहे विभिन्न संगठन एवं कार्यकर्ताओ का समर्थन किया हैं और सरकार से शीग्र ही क्षेत्र में हो रही इस तरह कि घटनाओ पर अंकुश लगाने एवं उपरोक्त मामलो की समुचित जाँच कराने की मांग की हैं ताकि जिले में लगातार हो रही चोरी की इन घटनाओ की साजिश का पर्दाफाश हो सके ।
पुलिस व प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ब्रज भाटा चौक स्थित सडक मार्ग के किनारे सुबह साढे नौ बजे से लोगों के पहुँचने का सिलसिला शुरू हो गया। दोपहर तक नगर पालिकाध्यक्ष दिलीप सोनी, उपाध्यक्ष घीसाराम जाट, प्रतिपक्ष नेता ओमप्रकाश बोहरा, पार्षद राकेश मेवाडा, नथाराम भाटी, माता महाकाली मन्दिर विकास समिति के मांगीलाल सोलंकी, मूलाराम घांची, सहित सैकडों लोग वहां एकत्रित हो गए। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात करना पडा।
लोगों ने वहां धरना दिया और पुलिस की कार्रवाई पर रोष जताया। कांग्रेस नेता जयसिंह राजपुरोहित व धरनार्थियों ने बताया कि पुलिस ने तीन दिन में वारदात का खुलासा नहीं किया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। इसके बाद मन्दिर समिति के पदाघिकारी, कांग्रेस नेता व धरनार्थियों का प्रतिनिधिमण्डल थाने पहुंचा । उन्होंने सीओ बाली मोहनलाल खिन्नीवाल से आरोपियों का पता लगाने की मांग की। मारवाड जैन संघ मुंबई प्रमुख भरत सोलंकी ने सादडी के महाकाली, बागोल के चिंतामणि और सोजत के करणी माता मंदिर सहित जिले में हुई चोरी की कई वारदातों का पर्दाफाश नहीं करने के विरोध में पुलिस के खिलाफ धरना दे रहे विभिन्न संगठन एवं कार्यकर्ताओ का समर्थन किया हैं और सरकार से शीग्र ही क्षेत्र में हो रही इस तरह कि घटनाओ पर अंकुश लगाने एवं उपरोक्त मामलो की समुचित जाँच कराने की मांग की हैं ताकि जिले में लगातार हो रही चोरी की इन घटनाओ की साजिश का पर्दाफाश हो सके ।
Friday, November 6, 2009
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